▪︎ हिन्दुत्व जीत गया, 13 दिनों तक प्रताड़ित कर मेरा जीवन नष्ट कर दिया गया: प्रज्ञा
Mumbai News: 17 वर्षों की अदालती कार्यवाही, सुनवाई, हजारों साक्ष्य और सैकड़ों गवाहों के बीच अंतत: मालेगांव शहर में हुए vभीषण बम विस्फोट मामले पर गुरुवार को कोर्ट का फैसला आ ही गया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा, ‘केवल संदेह के आधार पर आरोपितों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, इसलिए सभी आरोपितों को बरी किया जा रहा है।’
मालेगांव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच स्थित शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कम्पनी के सामने 29 सितम्बर 2008 को यह विस्फोट हुआ था। विस्फोट रात 9.35 बजे हुआ। उसके बाद सनसनी फैल गयी। इस बम विस्फोट में 06 निर्दोष नागरिकों की जान चली गयी थी और 100 से ज्यादा लोग गम्भीर रूप से घायल हुए थे। जांच एजेंसी ने इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित 11 आरोपितों पर मामला दर्ज किया था और सात आरोपितों को गिरफ्तार किया था।
अब 17 साल बाद इस मामले में फैसला आया है और कोर्ट ने सभी आरोपियों को निर्दोष बरी कर दिया गया है। एनआईए की विशेष अदालत ने भोपाल से पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह और कर्नल पुरोहित समेत सात आरोपियों को बरी कर दिया है। अन्य बरी होनेवालों में मेजर रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर द्विवेदी के नाम शामिल हैं।
मालेगांव पुलिस अलर्ट मोड पर
मालेगांव एवं महाराष्ट्र पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरत रही है कि इस परिणाम से कोई तनाव पैदा न हो। इस परिणाम पर न केवल महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश की नजर थी। इस फैसले के मद्देनजर मालेगांव में कड़ी पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की गयी है। खबर है कि मालेगांव के हर चौक चौराहे पर पुलिस तैनात है। सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किये गये हैं।
मालेगांव विस्फोट मामले में बरी होने के बाद साध्वी प्रज्ञा जतायी प्रसन्न्ता
महाराष्ट्र के मालेगांव बम विस्फोट मामले में बरी होने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने गुरुवार को कहा कि आज हिन्दुत्व की जीत हुई है, भगवा जीत गया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे 17 सालों तक अपमानित किया गया, लेकिन मैं आज राहत महसूस कर रही हूं।’
अदालत का फैसला सुनने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह भावुक हो गयीं। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘जब मुझे पहली बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था, तो मैं मानवता और न्याय के सम्मान के साथ आयी थी। मुझे 13 दिनों तक प्रताड़ित किया गया। मेरा जीवन नष्ट कर दिया गया। मुझे 17 साल तक अपमानित किया गया। मुझे अपने ही देश में आतंकवादी बना दिया गया। मैं उन लोगों के बारे में कुछ नहीं कह सकती, जिन्होंने मुझे इन दिनों तक पहुंचाया। मैं जीवित हूं, क्योंकि मैं एक संन्यासी हूं।’
उन्होंने कहा कि संन्यासी, संत भी हर समय मर रहे हैं। उन्होंने भगवान को कलंकित किया है। फैसले के बाद साध्वी प्रज्ञा ने जजों का शुक्रिया अदा किया। मेरी बात सुनने और मुझे समझने के लिए धन्यवाद।



