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कोयला उत्पादन में उछाल : 5.73% वृद्धि के साथ 928.95 मिलियन टन तक पहुंचा

कोयला उत्पादन में उछाल : 5.73% वृद्धि के साथ 928.95 मिलियन टन तक पहुंचा

प्रेषण भी 5.50% बढ़कर 929.41 मिलियन टन हुआ, कैप्टिव उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़त

New Delhi news: देश में कोयला उत्पादन और प्रेषण में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. फरवरी 2025 तक भारत का संचयी कोयला उत्पादन 928.95 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 878.55 मिलियन टन था. यह 5.73% की वृद्धि को दर्शाता है. इसी तरह, कोयला प्रेषण भी 5.50% बढ़कर 929.41 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 880.92 मिलियन टन था.

कैप्टिव और निजी कंपनियों का योगदान बढ़ा

कोयला उत्पादन में कैप्टिव और निजी संस्थाओं की भागीदारी भी बढ़ी है. फरवरी 2025 तक इन स्रोतों से 173.58 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ, जो पिछले वर्ष के 133.36 मिलियन टन की तुलना में 30.16% अधिक है. इसी तरह, कैप्टिव और अन्य संस्थाओं से कोयला प्रेषण 31.90% की वृद्धि के साथ 178.02 मिलियन टन तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 134.96 मिलियन टन था.

सीआईएल की प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन

देश में कोयला उत्पादन का बड़ा हिस्सा कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की सहायक कंपनियों द्वारा किया जाता है. इन कंपनियों में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) प्रमुख हैं.

•भारत कोकिंग कोल लिमिटेड : बीसीसीएल, जो झारखंड में कोकिंग कोल उत्पादन के लिए जानी जाती है, ने इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है. कंपनी ने फरवरी 2025 तक कुल 45 मिलियन टन से अधिक कोयले का उत्पादन किया.

•सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड : सीसीएल, जो झारखंड और छत्तीसगढ़ में सक्रिय है, ने 77 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन और प्रेषण किया.

•नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ): उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्थित एनसीएल ने 110 मिलियन टन से अधिक कोयले का उत्पादन किया.

•वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड : महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में काम करने वाली डब्ल्यूसीएल कंपनी का कुल कोयला उत्पादन 60 मिलियन टन के करीब रहा.

ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत

कोयला उत्पादन और प्रेषण में इस वृद्धि से ऊर्जा क्षेत्र को स्थिरता मिलेगी, जिससे बिजली संयंत्रों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी. सरकार की नीतियों और कोयला मंत्रालय की सक्रिय भागीदारी के चलते कोयला उत्पादन में यह निरंतर वृद्धि देखी जा रही है. आगामी महीनों में यह रुझान जारी रहने की संभावना है.

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