New Delhi : पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की भूमिका और उसके जवाब में आॅपरेशन सिंदूर पर भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखने के लिए केंद्र सरकार ने सात डेलिगेशन गठित किए हैं, जिनमें अलग-अलग दलों के 51 सांसद और पूर्व मंत्री शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय विदेश मंत्रालय के 8 अधिकारी भी इन प्रतिनिधिमंडलों का हिस्सा हैं। बैजयंत पांडा (भाजपा), रविशंकर प्रसाद (भाजपा), संजय कुमार झा (जदयू), श्रीकांत शिंदे (शिवसेना), शशि थरूर (कांग्रेस), कनिमोझी करुणानिधि (डीएमके) और सुप्रिया सुले (राकांपा-सपा) के नेतृत्व में ये सातों प्रतिनिधिमंडल कुल 32 देशों और आखिरी में सभी 59 सदस्य बेल्जियम के ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ मुख्यालय का दौरा करेंगे। लेकिन सांसदों के चयन पर बवाल मच गया है। दरअसल, कांग्रेस ने जिन चार सांसदों का नाम डेलिगेशन के लिए भेजा था उनको दरकिरार कर शशि थरूर को शामिल किया है।
बात करें कांग्रेस की तो कांग्रेस द्वारा सुझाए गए चार नामों में से सिर्फ आनंद शर्मा को प्रतिनिधियों की सूची में शामिल किया गया। शेष तीन नाम- गौरव गोगोई, सैयद नसीर हुसैन और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को जगह नहीं दी गई। बल्कि सूची से परे हटकर प्रतिनिधिमंडल में शशि थरूर, मनीष तिवारी, अमर सिंह और सलमान खुर्शीद को शामिल किया है। चार नेताओं में से केवल एक को ही स्थान दिए जाने पर कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने आपत्ति भी जताई है। उन्होंने एक बयान में कहा कि यह नरेंद्र मोदी सरकार की पूर्ण निष्ठाहीनता को साबित करता है तथा गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर उसके द्वारा खेले जाने वाले सस्ते राजनीतिक खेल को दशार्ता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के आग्रह पर शामिल किए गए चार प्रतिष्ठित कांग्रेस सांसद/नेता निश्चित रूप से प्रतिनिधिमंडल के साथ जाएंगे और अपना योगदान देंगे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि एक मिशन एक संदेश एक भारत सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही आॅपरेशन सिंदूर के तहत प्रमुख देशों से संपर्क करेंगे, जो आतंकवाद के खिलाफ हमारे सामूहिक संकल्प को दर्शाता है।’ प्रतिनिधिमंडल में पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद, एमजे अकबर, आनंद शर्मा, वी मुरलीधरन, सलमान खुर्शीद और एसएस अहलूवालिया शामिल हैं, जो वर्तमान में संसद सदस्य नहीं हैं।
हर डेलिगेशन में मुस्लिम चेहरा
गौरतलब है कि इन सातों डेलिगेशन में शामिल सदस्यों में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के 31 और विपक्षी दलों के 20 सांसद व पूर्व मंत्री शामिल हैं। प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल में सात या आठ सदस्य शामिल हैं और उन्हें सहयोग देने हर प्रतिनिधिमंडल के साथ विदेश सेवा के कम से कम एक अधिकारी को अटैच किया गया है। सभी प्रतिनिधिमंडलों में कम से कम एक मुस्लिम प्रतिनिधि भी है, चाहे वह राजनेता हो या राजनयिक।



