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Dhanbad: तड़पता कर्ण नाटक का मंचन

Dhanbad: तड़पता कर्ण नाटक का मंचन

Dhanbad news: धनबाद जिला अंतर्गत भूली की नाट्य संस्था कला निकेतन ने संगीत नाटक अकादमी भारत के संयुक्त तत्वावधान में नीरज मेमोरियल स्कूल के सभागार में “तड़पता कर्ण” नाटक का मार्मिक मंचन बशिष्ठ प्रसाद सिन्हा के लेखन व निर्देशन में किया। संचालन मानसरंजन पाल व जीतेन्द्र कुमार ने किया। कार्यक्रम का शुरुआत पूर्व बैंक प्रबंधक सह संस्था के मुख्य संरक्षक राजेन्द्र कुमार, स्कूल के निदेशक बिजय कुमार, संजय बक्शी, झारखंड संस्कृतिक रंगमंच की निर्देशिका पिंकी पासवान ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर किया। नाटक की शुरुआत ‘हाय कर्ण तू क्यों जन्मा था जन्मा तो क्यों वीर हुआ, कवच और कुंडल भूषित भी तेरा अधम शरीर हुआ ‘ से किया गया।  इस नाटक में कुंती पुत्र कर्ण के जन्म से मृत्यु तक तड़पन ही तड़पन की व्यथा को दर्शाया गया। नाटक के माध्यम से बताया गया कौमार्या अवस्था में कुंती के गर्भ से सूर्य के आशीर्वाद से कर्ण का जन्म हुआ। लोक लाज के डर से कुंती नवजात शिशु को मंजूषा में रख नदी की धारा में प्रवाहित कर देती है। जिसके बाद अधिरथ सारथि और राधा कर्ण का पालन पोषण करते है । कर्ण जन्मजात कवच-कुंडल धारी रहता है। उसके मुख मंडल पर सूर्य की आभाकृति एव दिव्य पौरुष की छटा विद्यमान थी । वह जब धनुर्विद्या की शिक्षा के लिए गुरु द्रौणाचार्य  के पास जाता है तो सुतपूत्र होने के कारण उसे निकाल दिया जाता है । फिर वह ब्राह्मण का वेश धारण कर गुरु परशुराम से शिक्षा ग्रहण करने लगता है, परंतु अंत समय में छल करने के आरोप में अभिशाप मिल जाता है। हस्तिनापुर की रंग भूमि में कर्ण के रण कौशल  एव सुतपूत  होने पर प्रश्न चिन्ह खड़ा किया गया। उधर देवराज इंद्र भी छल से कर्ण का कवच और कुंडल हर ले जाते हैं । महासंग्राम शुरू होने से पहले कुंती भी माता होने का सबूत लेकर आती है और पांच पुत्रों की माँ होने का वचन लेकर चली जाती है ।  युध्द के अंतिम क्षण में  जब कर्ण के रथ का पहिया पृथ्वी में धँस जाता है तब उसी समय केशव के आदेश पर अर्जुन बाण चला देता है जिससे कर्ण की मृत्यु हो जाती है। कार्यक्रम का संचालन मानसरंजन पाल व जीतेन्द्र कुमार नें किया। कलाकारों में शैव्या सहाय, आकाश सहाय,  क्रान पासवान,  दीपक पंडित, राकेश कुमार, प्रेम कुमार, रंजीत कुमार मिश्रा, चंदन यादव, धर्मवीर कुमार, इश्तेयाक अहमद,  प्रवीर  कुमार,बशिष्ठ प्रसाद सिन्हा, नूतन सिन्हा, नित्या सहाय आदि शामिल थे ।

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