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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत फिर कांग्रेस में हुए शामिल

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत फिर कांग्रेस में हुए शामिल

Kolkata News: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने चार साल बाद कांग्रेस में वापसी कर ली है। बुधवार को उन्होंने पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार की मौजूदगी में कांग्रेस का झंडा थामा। अभिजीत ने कहा कि भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ संघर्ष के लिए कांग्रेस ही एकमात्र विकल्प है।

2021 में कांग्रेस छोड़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये थे

अभिजीत मुखर्जी 2021 में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये थे, लेकिन तृणमूल में उन्हें कोई खास जिम्मेदारी नहीं मिली। पार्टी ने उन्हें न तो लोकसभा का टिकट दिया और न ही विधानसभा चुनाव में उतारा। पिछले कुछ महीनों से वह तृणमूल में अपनी भूमिका को लेकर असंतोष जता रहे थे। आखिरकार उन्होंने फिर से कांग्रेस का दामन थाम लिया। माना जा रहा है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उन्हें टिकट दे सकती है।

2012 में जंगीपुर लोकसभा सीट से उपचुनाव जीतकर कांग्रेस सांसद बने थे

अभिजीत मुखर्जी 2012 में जंगीपुर लोकसभा सीट से उपचुनाव जीतकर कांग्रेस सांसद बने थे। यह सीट उनके पिता प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद खाली हुई थी। 2014 में उन्होंने फिर से इस सीट पर जीत दर्ज की, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल उम्मीदवार से भारी मतों से हार गए। इसके बाद से वे राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे।अभिजीत 2021 में कांग्रेस छोड़ कर तृणमूल में शामिल हो गये। तब उन्होंने कहा था कि वह जनता की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन तृणमूल में उन्हें कोई खास अवसर नहीं मिला। पिछले कुछ महीनों से वह पार्टी में अपनी स्थिति को लेकर नाखुश थे।

भाजपा के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस से बेहतर विकल्प नहीं

कांग्रेस में वापसी के बाद अभिजीत मुखर्जी ने कहा कि “भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। आज भी भारत के हर गांव में कम से कम एक-दो कांग्रेस समर्थक परिवार मौजूद हैं। मेरा प्रयास होगा कि कांग्रेस में लोगों का भरोसा दोबारा मजबूत करूं।”उन्होंने दिल्ली नगर निगम चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के बिना विपक्ष का अस्तित्व संभव नहीं है। उनकी वापसी से पश्चिम बंगाल कांग्रेस को कितना फायदा होगा, यह आनेवाले समय में स्पष्ट होगा। लेकिन, उनके लौटने से पार्टी को राज्य में एक अनुभवी चेहरा जरूर मिल गया है।

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