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झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को लागू करना शिक्षा विभाग के लिए बना चुनौती

झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को लागू करना शिक्षा विभाग के लिए बना चुनौती

Ranchi news : झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को निर्धारित समय में लागू करना शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बन गया है। 23 सितंबर 2024 को झारखंड उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए नई नियमावली बनाने की जरूरत नहीं है। इसके लिए साल 1993 की प्रोन्नति नियमावली ही काफी है। इस क्रम में हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि शिक्षकों की प्रोन्नति को 23 जनवरी 2025 तक हर हाल में पूरा करना होगा। यानी सुनवाई की तिथि 23 सितंबर 2024 से इसके लिए विभाग को चार माह का कोर्ट ने समय दिया था। कोर्ट को आदेश दिए हुए लगभग 3 महीने पूरे होने वाले हैं, लेकिन अभी तक इस मामले में शिक्षा विभाग ने कोई खास सक्रियता नहीं दिखाई है। इसी बीच झारखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई है। इस कारण शिक्षा विभाग की व्यस्तता बढ़ गई है। ऐसे में हाई कोर्ट के आदेश को निर्धारित समय में लागू करना शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बन गया है। एक और विभाग को कोर्ट के आदेश का पालन करना है तो दूसरी ओर चुनाव संबंधी कार्य भी निपटाने हैं।

विधानसभा चुनाव से प्रभावित हो सकता है काम

मालूम हो कि झारखंड में इस बार विधानसभा चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे। पहले चरण के लिए उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। पहले चरण का चुनाव झारखंड में 13 नवंबर को होना है। दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को होगा। चुनाव का परिणाम 23 नवंबर को निकलेगा। चुनाव के कार्यक्रम के अनुसार राज्य सरकार के सभी विभाग 23 नवंबर तक काफी व्यस्त हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग के पास 24 नवंबर 2024 से 23 जनवरी 2025 के बीच शिक्षकों की प्रोन्नति का कार्य पूरा करना होगा। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 5 जनवरी 2025 को पूरा हो रहा है। ऐसे में यह लगता है अब शिक्षकों की प्रोन्नति का कार्य नई सरकार की देखरेख में ही संपन्न होगा।

हाई कोर्ट के फैसले एक नजर में

1. प्रोन्नति के लिए नया नियमावली बनाने की आवश्यकता नहीं है। 1993 प्रोन्नति नियमावली ही यथेष्ट है प्रोन्नति के लिए।

2. प्रोन्नति की प्रक्रिया दिनांक 23.09.2024 की तिथि से चार माह के अंदर अर्थात् 23.01.2025 से पूर्व पूर्ण करना होगा।

3. वरीयता का निर्धारण ग्रेड 4 प्राप्त करने की तिथि होगी। उस आधार पर ही वरीयता निर्धारित होगी। किसी कोटि में कार्यरत सभी शिक्षकों का पारस्परिक वरीयता भी मेधांक से नहीं होकर योगदान तिथि से होगी।

4. डिवीजन बैंच में दिए आदेश के आलोक में सीधी नियुक्ति से भर्ती ग्रेड-4 शिक्षकों की वरीयता की व्याख्या आदेश के आलोक में करते हुए विभाग को आवश्यक आदेश/संकल्प जारी करना होगा।

5. पुरी प्रोन्नति प्रक्रिया उपरोक्त न्याय आदेशों के आलोक में 1993 प्रोन्नति नियमावली में वर्णित सुसंगत प्रावधानों के आलोक में ही होगी और इन्हीं आदेशों के अनुरूप सभी जिलों में वरीयता सूची का प्रकाशन करते हुए प्रोन्नति का कार्य ससमय संपन्न कराना‌ होगा।

6. मार्गदर्शन पत्र -866 पुरी तरह से और 770 के पैरा 12 एक प्रकार से निरस्त कर दिया गया है।

जल्द लागू किया जाए हाई कोर्ट का आदेश : संघ

इस बाबत झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष आंनद किशोर साहू और प्रदेश महासचिव बलजीत कुमार सिंह ने कहा है कि डिवीजन बैंच में LPA पर आया निर्णय और सिंगल बैंच में आया यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब विभाग से अपेक्षा है कि बिना समय गंवाए कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए शीघ्र संबंधित आदेश के आलोक में विभागीय आदेश/ संकल्प जारी करते हुए नए सीरे से वरीयता सूची प्रकाशित करने संबंधी दिशा निर्देश जिलों को देना चाहिए, जिससे कोर्ट द्वारा निर्धारित टाइम प्रेम में अर्थात जनवरी तक  1993 प्रोन्नति नियमावली के अंतर्गत प्रोन्नति देते हुए सभी रिक्त हेडमास्टर के पदों को भरा जा सके।

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