New Delhi News: भारत ने पाकिस्तान के साथ 1960 की ऐतिहासिक सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का बड़ा फैसला किया है। यह निर्णय 10 मई के युद्धविराम के बाद भी हुआ है। इसका मुख्य कारण पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बताया गया है। उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक और ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट किया है कि सिर्फ युद्धविराम पर्याप्त नहीं, पाकिस्तान को पहले आतंकवाद के समर्थन से स्पष्ट और अपरिवर्तनीय दूरी बनानी होगी।
पाकिस्तान पर क्यों बढ़ा दबाव?
सरकार के सूत्रों के मुताबिक, भारत ने सिंधु संधि की सद्भावना और अच्छे पड़ोसी सम्बन्धों वाली प्रस्तावना के उल्लंघन का हवाला देकर संधि को स्थगित किया है। पाकिस्तान द्वारा किये गये ड्रोन हमलों, मिसाइल हमलों और पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गये) ने भारत को यह सख्त कदम उठाने पर मजबूर किया।
भारत का स्पष्ट संदेश
भारत पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए तैयार नहीं, क्योंकि बात करने को कुछ है ही नहीं। डीजीएमओ स्तर की वार्ता ही एकमात्र सैन्य संवाद माध्यम बना हुआ है। यदि इसके बाद भी पाकिस्तान ने किसी भी प्रकार की आक्रामकता दिखायी, तब भारत सैन्य जवाब देने से नहीं हिचकेगा।
वहीं, सिंधु संधि की पुनर्बहाली तब ही होगी जब पाकिस्तान आतंकवाद के समर्थन को सार्वजनिक और स्थायी रूप से त्याग देगा। भारत चाहता है कि पाकिस्तान यह दिखाये कि वह एक जिम्मेदार पड़ोसी और अंतरराष्ट्रीय साझेदार है।



