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मुर्शिदाबाद हिंसा : ममता सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट से कहा; हालात पूरी तरह नियंत्रण में

मुर्शिदाबाद हिंसा :  ममता    सरकार  ने कलकत्ता हाई कोर्ट से कहा; हालात पूरी तरह नियंत्रण में

▪︎ जांच के लिए एसआईटी गठित, परिजनों ने ठुकराया मुआवजा

Kolkata News: वक्फ बार्ड संशोधन अधिनियम के विरोध में भड़की हिंसा से प्रभावित पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले को लेकर राज्य सरकार ने गुरुवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में जानकारी दी। राज्य सरकार ने न्यायालय को सूचित किया कि जिले की स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। सरकार ने दावा किया कि पुलिस और प्रशासन ने हालात को काबू में लाने के लिए पर्याप्त कदम उठाये हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान

उधर, हिंसा में विस्थापित महिलाओं की पीड़ा पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। यह जानकारी उच्च न्यायालय में उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आयी, जिसे विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेन्दु अधिकारी ने दाखिल की थी।उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया कि मुस्लिम बहुल इलाके में साम्प्रदायिक दंगे के दौरान बम धमाके हुए और पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने की मांग की। सीएपीएफ की तैनाती जारी रखने की मांग-इस मामले में केन्द्र सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए वकील ने मुर्शिदाबाद में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की तैनाती को आगे भी बढ़ाने का आग्रह किया। वर्तमान में जिले के सूती, शमशेरगंज और धूलियान जैसे अति संवेदनशील इलाकों में केन्द्रीय बलों की 17 कम्पनियां तैनात हैं। एसआईटी गठित, 150 से अधिक गिरफ्तार-राज्य पुलिस ने हिंसा की जांच के लिए नौ सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब बीते सप्ताह से चल रहे विरोध प्रदर्शन ने 11 अप्रैल को हिंसक रूप ले लिया था। इसी दौरान शमशेरगंज इलाके में हरगोविंद दास और उनके बेटे चंदन दास की निर्मम हत्या कर दी गयी। पुलिस ने अब तक 150 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।

मारे गए लोगों के घर पहुंची पुलिस की फोरेंसिक टीम

गुरुवार को मारे गये दोनों लोगों के घर पहुंची पुलिस की फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सैंपल एकत्र किये। पूरे इलाके में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की तैनाती है। स्थानीय लोगों ने यहां स्थायी बीएसएफ कैंप की मांग की है और इसके लिए जमीन देने की भी पेशकश की है। सरकारी मुआवजा ठुकराया, इलाके में अब भी भयमुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख मुआवजा देने की घोषणा की थी। लेकिन, पीड़ित परिवार ने मुआवजा लेने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि जब वे अपने प्रियजनों को खो चुके हैं, तब इस मुआवजे का कोई अर्थ नहीं बचा। परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि पुलिस समय पर पहुंचती, तो शायद जानें बच जातीं। इलाके में आज भी भय का माहौल है। यहां तक कि 15 अप्रैल को मृतकों के श्राद्ध संस्कार के लिए पुजारी और नाई भी डर के कारण नहीं पहुंचे। 

प्रशासन का दावा : हालात सामान्य

दक्षिण बंगाल के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सुप्रतीम सरकार ने कहा, “फिलहाल स्थिति सामान्य है। सीआरपीएफ, राज्य पुलिस और संयुक्त बल तैनात हैं। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार स्वयं शमशेरगंज थाने में मौजूद रहे। नियंत्रण कक्ष खोला गया है और किसी को भी परेशानी हो, तो सीधे सम्पर्क कर सकता है। वक्फ बोर्ड संशोधन विरोधी हिंसा के चलते कई लोग अपने घर छोड़कर मालदा जिले के एक स्कूल में बनाये गये राहत शिविरों में रह रहे हैं। एक याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि सरकार इन विस्थापितों को उनके घर वापस भेजने की व्यवस्था करे। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि कुछ प्रभावित परिवार पहले ही घर लौट चुके हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग सक्रिय-हिंसा में विस्थापित महिलाओं की पीड़ा पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग की एक टीम शुक्रवार और शनिवार को मुर्शिदाबाद पहुंचकर महिला पीड़ितों से मुलाकात करेगी और जिले के प्रशासनिक अधिकारियों से भी बातचीत करेगी।

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