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पाकिस्तानी नागरिक ने कोलकाता में दो बार डाला वोट, फर्जी दस्तावेज से वोटर कार्ड बनवाया था

पाकिस्तानी नागरिक ने कोलकाता में दो बार डाला    वोट, फर्जी दस्तावेज से वोटर कार्ड बनवाया था

North 24 Pargana: पश्चिम बंगाल में गम्भीर सुरक्षा चूक वाले मामले का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता से गिरफ्तार पाकिस्तानी नागरिक आजाद मलिक के खिलाफ जांच तेज कर दी है, जिसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत का मतदाता पहचान पत्र बनवाया और दो बार 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान किया।
गौरतलब है कि आजाद मलिक उत्तर 24 परगना जिले के दमदम उत्तर विधानसभा क्षेत्र का पंजीकृत मतदाता था, जो दमदम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पूछताछ में उसने स्वयं दोनों बार मतदान करने की बात स्वीकार की है। यह सवाल उठ रहा है कि मतदाता सूची की नियमित समीक्षा के दौरान इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और फर्जी दस्तावेजों को वैध कैसे मान लिया गया।
ईडी ने भारत निर्वाचन आयोग और राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय से सम्पर्क कर पूरे मामले की जानकारी मांगी है। एजेंसी यह जानना चाहती है कि आजाद ने कौन-कौन से दस्तावेजों के जरिये एढकउ कार्ड हासिल किया और किस स्तर पर लापरवाही बरती गयी।
ईडी के मुताबिक प्रारम्भ में आजाद मलिक ने खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताया था और भारतीय पासपोर्ट समेत कई पहचान पत्र बनवा लिये थे, लेकिन 29 अप्रैल को कोलकाता की विशेष अदालत में पेशी के दौरान उसने स्वीकार किया कि वह असल में पाकिस्तान का मूल निवासी है। उसने पहले फर्जी तरीके से बांग्लादेशी नागरिकता प्राप्त की और फिर भारतीय दस्तावेज हासिल कर भारत में रहना शुरू कर दिया।
इस खुलासे ने राजनीतिक गलियारों में भी हड़कम्प मचा दिया है। विपक्ष के नेता शुभेन्दु अधिकारी ने इसे तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में विदेशी नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने की साजिश करार दिया है।
उल्लेखनीय है कि दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप विधानसभा क्षेत्र का मतदाता न्यूटन दास सोशल मीडिया पर बांग्लादेश के छात्र आन्दोलन में हिस्सा लेता नजर आ रहा है। आरोप है कि दास के पास भारत और बांग्लादेश दोनों की नागरिकता है। इस पर चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को जांच के निर्देश दिये हैं।
ईडी की जांच इस दिशा में इशारा कर रही है कि सीमावर्ती इलाकों में फर्जी दस्तावेजों के जरिये विदेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता और मतदान अधिकार दिलाने का संगठित रैकेट काम कर रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के मामले सत्तारूढ़ दल के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
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