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कोटे में कोटा से हो सकती है जाति जनगणना की काट 

कोटे में कोटा से हो सकती है जाति जनगणना की काट 

New Delhi news : कोटे में कोटा यानी आरक्षण का लाभ उठा रही अनुसूचित जातियों और जनजातियों में शामिल उन जातियों की पहचान करना, जिन्हें अब तक आरक्षण का समुचित लाभ इसलिए नहीं मिल पाया, क्योंकि यह लाभ ज्यादातर उन जातियों को मिला जो वंचितों में अगड़ी थीं। इसलिए अब उन पर इन्हें वरीयता दी जानी चाहिए। यही ‘कोटे में कोटा’ का दांव अब भाजपा नीत एनडीए का जाति आधारित जनगणना के अचूक माने जा रहे अस्त्र की काट बन सकता है।

भाजपा और कांग्रेस का रुख स्पष्ट नहीं रहा है

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में उप वर्गीकरण कर आरक्षण का लाभ इस तरह वंचित वर्गों में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया था। तब से इस पर सभी दल सधी प्रतिक्रिया देते रहे हैं। खासतौर पर भाजपा और कांग्रेस का रुख स्पष्ट नहीं रहा है। मायावती की बहुजन समाज पार्टी इसका मुखर विरोध करती रही है। अब जबकि भाजपा की स्पष्ट बहुमत की हरियाणा  सरकार इसे प्रायोगिक रूप में लागू कर रही है, तो तय है कि दूसरे दल भी अब ज्यादा दिन इस पर गोलमोल रुख नहीं रख पाएंगे और राजनीतिक विमर्श तेज होगा। निश्चित ही इससे नए राजनीतिक समीकरण भी बनेंगे। इसका अंदाजा उत्तर प्रदेश में अस्तित्व रक्षा के लिए लंबे समय बाद उपचुनाव में उतरने जा रही बसपा की प्रतिक्रिया से लगाया जा सकता है।

मायावती इसे उचित नहीं मानतीं

बसपा अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कोटे के भीतर कोटा किया जाना उचित नहीं है। यह फैसला अनुसूचित जाति के लोगों को फिर से बांटने और उन्हें आपस में लड़ाते रहने का षड्यंत्र है। इसे घोर आरक्षण विरोधी निर्णय बताते हुए पोस्ट में लिखा कि हरियाणा सरकार को ऐसा करने से रोकने के लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के आगे न आने से यह साबित हो रहा है कि कांग्रेस की तरह ही भाजपा भी आरक्षण को पहले निष्क्रिय व निष्प्रभावी बनाने और अंतत: उसे समाप्त करने का षड्यंत्र करने में लगी है। बसपा इसका विरोध करेगी। जातिवादी पार्टियों द्वारा एससी-एसटी व ओबीसी समाज में फूट डालो-राज करो व इनके आरक्षण विरोधी षड्यंत्र के खिलाफ बसपा का संघर्ष जारी रहेगा।

बसपा की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण

‘कोटे में कोटा’ के हरियाणा सरकार के फैसले के खिलाफ बसपा की सबसे पहले और सख्त प्रतिक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उस पर भाजपा की बी-टीम होने का आरोप लगता रहा है। शायद इसीलिए भाजपा के अन्य नेता भले खामोश रहे, लेकिन राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया में देरी नहीं की और कहा कि इसका विरोध अस्वीकार्य है। वे हरियाणा सरकार की ओर से अनुसूचित जाति के आरक्षण कोटे का उपवर्गीकरण कर वंचित अनुसूचित जातियों को इसका लाभ देने के निर्णय का स्वागत करते हैं। मौर्य ने एक्स पर लिखा कि ‘सुप्रीम कोर्ट के एक अगस्त 2024 के फैसले के तहत, मैं व्यक्तिगत तौर से हरियाणा सरकार के एससी/एसटी आरक्षण में उपवर्गीकरण लागू करने का स्वागत करता हूं। आरक्षण का लाभ उन वंचितों तक पहुंचना जरूरी है, जो 75 साल बाद भी इसका लाभ नहीं पा सके हैं। हमारे ही समाज का एक बड़ा हिस्सा जो बहुत पीछे रह गया था, उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सभी दलों की है।’

केंद्रीय नेतृत्व प्रतिक्रिया की थाह लेना चाहता है

मौर्य अभी अपने रुख को व्यक्तिगत इसलिए बता रहे, क्योंकि केंद्रीय नेतृत्व इस मुद्दे के प्रभाव व प्रतिक्रिया की थाह लेना चाहता है। महाराष्ट्र-झारखंड विधानसभा व उपचुनाव में इस मुद्दे की तासीर परखी जा सकती है और असर सकारात्मक दिखने पर बिहार चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में भी लागू किया जा सकता है। दरअसल, कोटे में कोटा से भाजपा अपने लिए बड़ा कुछ भले न हासिल कर पाए, लेकिन इससे वह सपा, बसपा, राजद जैसे दलों का आधार कमजोर जरूर कर सकती है, क्योंकि इससे न केवल अनुसूचित जाति/जनजाति के वोटों में विभाजन के साथ ओबीसी कोटे के आरक्षण पर भी बहस शुरू होगी जो एनडीए के पक्ष में जा सकती है।

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