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राजीव कृष्ण अगले साल मार्च में बन सकते हैं पूर्णकालिक डीजीपी

राजीव कृष्ण अगले साल मार्च में बन सकते हैं पूर्णकालिक डीजीपी

▪︎ मुख्यमंत्री के भरोसेमंद हैं कड़क और टेक्नोक्रेट राजीव कृष्ण

Lucknow News: नवनियुक्त कार्यवाहक पुलिस मुखिया राजीव कृष्ण की छवि एक कड़क, फील्ड में एक्टिव और टेक्नोक्रेट पुलिस अधिकारी की रही है। यही कारण रहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसेमंद और साफ छवि वाले अफसर की तलाश में आखिरकार उनकी ओर रुख किया।
राजीव कृष्ण फिलहाल कार्यवाहक डीजीपी के रूप में ही काम करेंगे, क्योंकि प्रदेश सरकार अभी यूपीएससी पैनल नहीं भेजेगी।
फरवरी महीने तक इनसे वरिष्ठ सात डीजी रिटायर हो चुके होंगे। तब यह वरिष्ठताक्रम में चौथे नंबर पर आ जाएंगे। ऐसे में जब यूपीएससी को नाम भेजा जाएगा, तो राजीव कृष्ण को पैनल में शामिल किया जा सकता है। माना जा रहा है कि मार्च में उनको पूर्णकालिक डीजीपी बना दिया जाएगा।
राजीव कृष्ण यूपी आईपीएस अफसरों की कॉडर लिस्ट में 12वें नंबर पर हैं। ऐसे में संघ लोकसेवा आयोग से इन्हें स्थाई डीजीपी के रूप में फिलहाल मान्यता नहीं मिल पाएगी। इसके लिए इन्हें मार्च 2026 तक इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि तब तक डीजी रैंक के कई और अफसर रिटायर हो चुके होंगे।

डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया:

उत्तर प्रदेश में डीजीपी की नियुक्ति के लिए 6 माह पहले नियमावली बनाई गई थी। हालांकि कैबिनेट से पास इस नियमावली को अब तक लागू नहीं किया गया है। इस नियमावली के तहत एक छह सदस्यीय समिति डीजीपी की नियुक्ति करेगी। इस समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे और इसमें मुख्य सचिव, यूपीएससी का एक सदस्य, उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग का अध्यक्ष या उनका नामित व्यक्ति, अपर मुख्य सचिव (गृह) और एक पूर्व डीजीपी शामिल होंगे।
यह कमेटी सेवा रिकॉर्ड, अनुभव और न्यूनतम छह महीने की शेष सेवा अवधि जैसे मानदंडों के आधार पर डीजीपी का चयन करेगी। डीजीपी की नियुक्ति दो वर्ष या रिटायरमेंट की अवधि तक इसमें जो पहले हो, की जा सकती है। साथ ही असंतोषजनक प्रदर्शन की स्थिति में सरकार उन्हें हटा भी सकती है।
कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण 11 अधिकारियों को पीछे छोड़ते हुए कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक बने हैं। यानी राजीव कृष्ण 11 अफसरों से जूनियर हैं। इनमें तीन अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। राजीव कृष्ण के पास सबसे लंबे समय तक के लिए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक बने रहने का मौका है, क्योंकि अभी इनके रिटायरमेंट में चार साल एक महीने का वक्त है।

रिजल्ट देने वाले अफसर

राजीव कृष्ण रिजल्ट ओरिएंटेड अफसर हैं। इन्हें जो भी टास्क मिलता है, उसे पूरी गंभीरता के साथ समय पर पूरा करने की कोशिश करते हैं।
उनके सामने सबसे बड़ा चैलेंज अपने सीनियर के साथ समन्वय बैठाने का होगा। सफी अहसन रिजवी (केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर), आशीष गुप्ता, आदित्य मिश्रा, 1990 बैच के संदीप सालुंके, दलजीत चौधरी (केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर), रेणुका मिश्रा, विजय कुमार मौर्य, एमके बशाल, तिलोत्मा वर्मा, 1991 बैच के आलोक शर्मा (केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर), पीयूष आनंद (केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर) को पछाड़ कर डीजीपी बने हैं।

क्यों मारी बाजी?

सूत्रों का कहना है कि कुछ अफसर चाहते थे कि प्रदेश को पहली महिला डीजीपी मिले। इसके लिए तिलोत्मा वर्मा का नाम सबसे ऊपर था, लेकिन तिलोत्मा वर्मा के नाम के साथ दो चीजें आड़े आ गईं। पहली- वह लंबे समय से फील्ड में नहीं रही हैं। वे वर्ष 2000 में सुल्तानपुर जिले की एसपी थीं। उसके बाद से कभी फील्ड में तैनाती नहीं मिली। उनका ज्यादातर समय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बीता।
दूसरी इनके स्थाई डीजीपी बनने का अवसर नहीं था।
करीब यही स्थिति बीके मौर्य के साथ भी हुई। बीके मौर्य जुलाई में रिटायर हो रहे हैं। उनको डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का करीबी माना जाता है। यही बीके मौर्य के खिलाफ गया।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर मौजूद दलजीत चौधरी के नाम की भी चर्चा हुई, लेकिन वे बीएसएफ जैसी अहम फोर्स की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मौजूदा समय में पाकिस्तान से टकराव चल रहा है। वहीं, नक्सलियों पर कमरतोड़ कार्रवाई हो रही है। ऐसे में दलजीत को वापस बुलाने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध करना पड़ता।

पहले भी अहम पदों पर रहे

राजीव कृष्ण सपा सरकार में भी अहम पदों पर रह चुके हैं। मुलायम सिंह की सरकार में डेढ़ साल तक आगरा, लखनऊ और बरेली के एसएसपी रह चुके हैं। मायावती सरकार में लखनऊ के कप्तान, लखनऊ रेंज के आईजी और मेरठ रेंज के आईजी रह चुके हैं।

ऐसे फाइनल हुआ नाम

राजीव कृष्ण को डीजीपी बनाए जाने से पहले प्रशांत कुमार के सेवा विस्तार की पूरी कोशिश की गई। डीजीपी मुख्यालय से लेकर गृह विभाग तक को सक्रिय रखा गया कि किसी भी समय केंद्र से सेवा विस्तार का आदेश आ सकता है। शाम 5 बजे तक आदेश का इंतजार होता रहा, लेकिन जब बात नहीं बनी, तो तुरंत नया नाम तय करने की कवायद शुरू हुई। शाम होते-होते प्रशांत कुमार, सीएम योगी से मिलने उनके कालिदास मार्ग स्थित आवास पहुंचे। वहीं, नए डीजीपी को लेकर मंथन हुआ।आखिरकार रेस में आगे रहे राजीव कृष्ण का नाम तय हो गया।

क्यों राजीव कृष्ण पर भरोसा?

राजीव कृष्ण ने 11 अफसरों को सुपरसीड करते हुए बाजी मार ली। इसके पीछे कई वजहें रहीं। जैसे 60 हजार 244 सिपाहियों की भर्ती को पूरी पारदर्शिता से अंजाम दिया। उन्हें हाईटेक पुलिसिंग का मास्टरमाइंड माना जाता है। बतौर एडीजी उन्होंने ‘ऑपरेशन पहचान’ एप तैयार कराया, जिससे अपराधियों पर शिकंजा कसा गया। महिला बीट और एंटी रोमियो स्क्वॉड की ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम भी इसी प्लेटफॉर्म से जोड़ी गई। ई-मालखाना, मुकदमों का डिजिटल रिकॉर्ड और साइबर अपराधों पर व्यापक अभियान- ये सभी उनकी सोच की देन हैं। बतौर आगरा एसएसपी, बीहड़ में सक्रिय अपहरण गिरोहों के खिलाफ उन्होंने जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की थी।

राजीव के वरिष्ठ कब होंगे रिटायर?

आशीष गुप्ता- 10 जून, 2025, आदित्य मिश्रा- 30 जून, 2025 विजय कुमार मौर्य- जुलाई, 2025, दलजीत चौधरी – नवंबर, 2025- तिलोत्मा वर्मा – नवंबर, 2025, संदीप सालुंके- फरवरी, 2026, एमके बशाल- फरवरी, 2026

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