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प्रदेश भाजपा ने की हार की समीक्षा, संगठन में फेरबदल की सम्भावना, स्थानीय मुद्दों की अनदेखी हार का कारण

प्रदेश भाजपा ने की हार की समीक्षा, संगठन में फेरबदल की सम्भावना, स्थानीय मुद्दों की अनदेखी हार का कारण

Ranchi news : झारखंड प्रदेश भाजपा ने दो दिनों तक विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार की समीक्षा की। समीक्षा बैठक के दौरान जो बातें निकल कर सामने आयी हैं, अब उनसे आलाकमान को अवगत कराया जायेगा। तीन दिसम्बर को दिल्ली में प्रदेश नेताओं संग बैठक होगी। यह बैठक कई मायनों में अहम होगी। इस बैठक में संगठन के आगे की रूपरेखा तय की जायेगी। जानकारी के अनुसार प्रदेश संगठन में बड़े फेर-बदल की सम्भावना जतायी जा रही है।

इस बार भाजपा 21 सीटों पर ही सिमट गयी

चर्चा इस बात की भी हो रही है कि झारखंड भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष से लेकर संगठन मंत्री, जिलाध्यक्ष, सहित कई जिलों के प्रभारियों को भी बदला जा सकता है। बताते चलें कि इस बार के चुनाव में भाजपा 21 सीटों पर ही सिमट गयी। संताल में 18 सीटों में से 17 सीटों पर शिकस्त झेलनी पड़ी। समीक्षा बैठक के दौरान कई नेताओं ने दो टूक कहा कि चुनाव में स्थानीय मुद्दों की अनदेखी की गयी। बाहरी नेताओं को टिकट देना भी हार का कारण बना। वहीं, प्रमंडलीय प्रभारियों ने भी कोई कारगर कदम नहीं उठाया। टॉप लीडर तक स्थानीय समस्याओं को भी सही तरीके से नहीं पहुंचाया गया।

प्रमंडल स्तर के नेताओं की भूमिका पर सवाल

बैठक में प्रमंडल स्तर के नेताओं की भूमिका पर सवाल खड़े किये गये। वहीं, बूथ से जिला स्तर के संगठन, कई जिलाध्यक्षों और प्रभारियों पर भी सवाल खड़े किये गये। कई नेताओं ने कहा कि प्रमंडल प्रभारियों की भी भूमिका संदिग्ध रही। नेताओं ने यह भी कि जिन्हें टिकट नहीं मिला, वे जुगाड़ से प्रभारी बन गये। लेकिन, किसी भी प्रमंडल में बीजेपी उम्मीदवारों को आपेक्षित जीत नहीं मिली। भाजपा ने अपने संगठन के छह प्रमंडलों में कोल्हान के लिए आदित्य साहू, दक्षिणी छोटानागपुर के लिए गणेश मिश्र, पलामू के लिए विकास प्रीतम, धनबाद के लिए प्रदीप वर्मा, हजारीबाग के लिए मनोज सिंह और संताल के लिए बालमुकुंद सहाय को प्रभारी बनाया गया था।

अब कठोर कदम उठाने की जरूरत

समीक्षा बैठक में शामिल नेताओं ने कहा कि अब कठोर कदम उठाने की जरूरत है। इस पर चिंतन और मंथन करने की जरूरत है। प्रभारियों द्वारा चुनाव दे दौरान सिर्फ खानापूर्ति की गयी। वे एसी रूम तक ही सिमटे रहे। उन्होंने भ्रमण करने के अलावा कुछ भी नहीं किया। नेताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय का अभाव रहा। बागियों ने भी भाजपा को नुकसान पहुंचाया। साथ ही, नेताओं ने यह भी मांग की, कि झारखंड में दलित और आदिवासी का कोई क्रांतिकारी नेता होना चाहिए, जो आदिवासी वोटों को एकजुट कर सके।

सदस्यता अभियान शुरू करने पर भी चर्चा

बैठक में सदस्यता अभियान शुरू करने पर भी चर्चा की गयी। प्रदेश नेताओं ने कहा कि सभी खामियों को दूर किया जायेगा, जिससे जनता की मजबूत आवाज बन सकें। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष, प्रदेश प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेई, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेन्द्र त्रिपाठी, प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, कार्यकारी अध्यक्ष रवीन्द्र राय सहित जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारी मौजूद थे।

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