New Delhi news : सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण फैसले में पीपीएल (फोनोंग्राफिक परफॉर्मेंस लिमिटेड) को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के खंडपीठ द्वारा अजूरे को दी गयी अस्थायी छूट को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अजूरे बिना उचित लाइसेंस और शुल्क अदा किए पीपीएल के कैटलॉग की ध्वनि रिकॉर्डिंग्स का उपयोग नहीं कर सकता।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक अंतरिम आदेश (पैरा 27) में अजूरे को RMPL से कम शुल्क पर लाइसेंस प्राप्त कर पीपीएल की रिकॉर्डिंग्स के उपयोग की अनुमति दी थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को निष्प्रभावी कर दिया है। साथ ही, हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश के पुराने आदेश को भी अमान्य घोषित कर दिया है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की टिप्पणियां केवल “प्रथम दृष्टया” थीं और उनका अंतिम निर्णय में कोई प्रभाव नहीं होगा। न्यायालय ने कहा कि यह निर्णय संतुलन स्थापित करने के लिए अंतरिम स्तर पर लिया गया था, और इसे निर्णायक नहीं माना जा सकता।
इस फैसले के बाद अब स्पष्ट है स्थिति
– अजूरे अब बिना लाइसेंस या शुल्क चुकाये पीपीएल की सामग्री का उपयोग नहीं कर सकता।
– पीपीएल को लाइसेंस जारी करने से रोकनेवाला कोई वैध आदेश अब अस्तित्व में नहीं है।
– सुप्रीम कोर्ट में पीपीएल की ओर से भारत के शीर्ष वरिष्ठ अधिवक्ताओं की एक मजबूत टीम ने पक्ष रखा, जिसमें मुकुल रोहतगी, डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, श्याम दीवान, नीरज किशन कौल और अन्य प्रमुख वकील शामिल थे।
इस ऐतिहासिक निर्णय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कॉपीराइट का उल्लंघन करनेवाले किसी भी उपयोगकर्ता को अब कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा और कॉपीराइट धारक का अधिकार सर्वोपरि रहेगा।



