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कुंडली का अष्टम भाव जातक की मृत्यु और पुनर्जन्म को भी दर्शाता है, जानिए इसके बारे में विस्तार से

कुंडली का अष्टम भाव जातक की मृत्यु और पुनर्जन्म को भी दर्शाता है, जानिए इसके बारे में विस्तार से

Dharm adhyatm, kundli ka ashtam bhav : मृत्यु का स्वरूप–कुंडली में स्थित अष्टम भाव मृत्यु के स्वरूप का भी बोध करता है। इस भाव से जातक की मृत्यु कारण, मृत्यु का स्थान एवं मृत्यु के समय की जानकारी मिलती है। यदि लग्नेश, तृतीयेश, एकादशेश एवं सूर्य आदि का प्रभाव अष्टम भाव तथा अष्टमेष पर पड़ता है तो जातक आत्म हत्या कर लेता है। ऐसे ही आकस्मिक दुर्घटना का पता अष्टम भाव से चलता है। यदि इस भाव में शुभ ग्रहों का प्रभाव होता है तो जातक शांतिपूर्ण शांति पूर्ण मृत्यु शैय्या को प्राप्त करता है।

विदेश यात्रा

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, अष्टम स्थान को समुद्र का स्थान माना गया है। इसलिए अष्टम भाव पर जब पापी अथवा क्रूर ग्रह का बुरा प्रभाव पड़ता है तो जातक के समुद्र पार विदेश यात्रा पर जाने के योग बनते हैं।

रहस्य की खोज

ज्योतिष में अष्टम भाव का संबंध शोध, गूढ़ विज्ञान में रुचि आदि को दर्शाता है। अष्टम भाव से तृतीय भाव का क्रम अष्टम है। अतः यह भाव भी रहस्मयी खोज से संबंधित है। उधर, पंचम भाव का संबंध जातकों की बुद्धि से होता है। इसलिए तृतीयेश तथा अष्टमेश का पंचम भाव अथवा पंचमेश से संबंध बनता है तो यह स्थिति जातक को महान खोजकर्ता बनाती है। ऐसे जातक शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हैं।

दुर्घटना

अष्टम भाव का संबंध दुर्घटना से होता है। व्यक्ति के जीवन में होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाएँ अथवा अचानक लगने वाली चोट आदि को अष्टम भाव से ही देखा जाता है। आकस्मिक/ गुप्त धन–अष्टम भाव से पैतृक संपत्ति, छुपा हुआ धन या संपत्ति को भी देखा जाता है। यदि किसी जातक को पैतृक संपत्ति मिलती है तो उसका संबंध अष्टम भाव से होता है।

आठवें भाव का अन्य भावों से अंतर्संबंध

✓मृत्यु भाव होने के कारण अष्टम भाव जातक की मृत्यु एवं उसके पुनर्जन्म को भी दर्शाता है। यह पूर्ण बदलाव, दूसरों का धन, एवं घर में किसी की मृत्यु होने के पश्चात प्राप्त होने वाले धन का भी बोध कराता है। यदि किसी जातक का आठवाँ भाव मजबूत नहीं होता है तो जातक को मृत्यु का आभास हो सकता है। यह जीवन में आकस्मिक घटना, उधार, विवाद, रहस्यवाद, गूढ़ विज्ञान, तंत्र-मंत्र, आत्म ज्ञान, षड्यंत्र, छुपी हुई चीज़ों से भी अनुभव कराता है।

✓वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में अष्टम भाव रीढ़ की हड्डी के आधार भाग को दर्शाता है। यह संसार के स्याह पक्ष को भी दिखाता है। अष्टम भाव से आपके उन रहस्यों पर भी विचार किया जाता है जिन्हें आप अपने तक ही सीमित रखना चाहते हैं। किसी जातक की कुंडली में यह भाव मनोचिकित्सक, ज्योतिष, मनोरोग आदि को बताता है।

✓कुंडली में अष्टम भाव बड़े भाई-बहनों के मार्ग में आने वाली बाधाएँ, दादी माँ के धार्मिक दृष्टिकोण, मोक्ष, वंशावली, देह त्याग, दुर्घटना के कारण होने वाली मृत्यु, भूत-प्रेत, आशाएँ, बॉस की कामनाएँ, समाज में आपके बड़े भाई-बहनों की स्थिति, करियर में लाभ, सहकर्मी, ससुराल पक्ष एवं उनका धन, आपके भाई जीवनसाथी की आय और संपत्ती, पिता के चरण, शत्रुओं के प्रयास आदि को दर्शाता है।

✓ज्योतिष में अष्टम भाव संतान की खु़ुशियों का बोध कराता है। आपकी संतान किस प्रकार की ख़ुशियों को प्राप्त करेगी। यह विचार आठवें भाव से किया जाता है। इसके अलावा यह भाव शत्रुओं की मृत्यु, शत्रुओं द्वारा रचा जाने वाला षड्यंत्र, उधारी तथा बीते जन्म के विषय में भी बताता है।

✓ज्योतिष में सातवें भाव को अष्टम भाव की अपेक्षा अधिक ख़तरनाक माना गया है। आठवां भाव सातवें भाव से लाभ को दर्शाता है। इसलिए यदि व्यक्ति का सप्तम भाव मजबूत नहीं होता है तो इसका बुरा प्रभाव आठवें भाव में भी देखने को मिलता है।

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