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कालाष्टमी क्या है, इसे कैसे और क्यों मनाया जाता है? साल में कभी 12 तो कभी 13 बार आता है यह पर्व

कालाष्टमी क्या है, इसे कैसे और क्यों मनाया जाता है? साल में कभी 12 तो कभी 13 बार आता है यह पर्व

Dharm adhyatm, Kalashtami :  कालाष्टमी प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आने वाला एक हिंदू त्यौहार है जोकि भगवान शिव के ही एक रौद्र रूप भगवान भैरव को समर्पित है। प्रत्येक माह में आने के कारण यह त्यौहार एक वर्ष में कुल 12 बार, तथा अधिक मास की स्थिति में 13 बार मनाया जाता है। काल भैरव को पूजे जाने के कारण इसे काल भैरव अष्टमी अथवा भैरव अष्टमी भी कहा जाता है। मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष को आने वाली मास में पड़ने वाली कालाष्टमी सबसे अधिक प्रसिद्ध है जिसे कालभैरव जयंती के नाम से जाना जाता है। कालाष्टमी के रविवार अथवा मंगलवार के दिन पड़ने पर इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि साप्ताह के ये दिन भी भगवान भैरव को समर्पित माने जाते हैं।

काल भैरव भगवान शिव के पांचवें आवतार

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव भगवान शिव के पांचवें आवतार हैं। इस दिन मां दुर्गा की पूजा का भी विधान है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कालाष्टमी, प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान काल भैरव जो की शिव शंकर के रुद्र स्वरूप हैं उनकी पूजा की जाती है। कालभैरव को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है।

कालाष्टमी ऐसे से मनाएं?

✓कालाष्टमी भगवान शिव के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, सूर्योदय से पहले उठकर जल्दी स्नान कर लें।

✓काल भैरव के लिए एक विशेष पूजा करें और अपने सभी पापों के लिए आशीर्वाद और क्षमा मांगें।

✓इस दिन आप जीवन में समृद्धि, सुख और सफलता प्राप्त करने के लिए उपवास भी कर सकते हैं।

कालाष्टमी पर भगवान भैरव को प्रसन्न करने के उपाय

✓कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की प्रतिमा के आगे सरसो के तेल का दीपक जलाएं और श्रीकालभैरवाष्टकम् का पाठ करें। मनोकामना पूर्ण होने तक प्रतिदिन इस उपाय को भक्ति भाव के साथ करें।

✓कालाष्टमी के दिन चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखकर 21 बिल्वपत्र शिवलिंग को चढ़ाएं

✓कुछ लोग काले कुत्ते को खिलाने में भी विश्वास करते हैं जिन्हें भगवान भैरव का वाहन माना जाता है। आप उन्हें दूध, दही और मिठाई खिला सकते हैं। इस उपाय को करने से भगवान भैरवऔर शनिदेव दोनों ही प्रस्सन होते हैं।

✓ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।

✓कालाष्टमी के दिन से लेकर 40 दिनों तक लगातार काल भैरव का दर्शन करें। इस उपाय को करने से भगवान भैरव प्रसन्न होंगे और आपकी मनोकामना को पूर्ण करेंगे।

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