Dharm adhyatm, akshaya tritiya : अक्षय तृतीया को सनातन धर्म में अत्यंत शुभ और पावन दिन माना गया है। इसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए पंचांग देखने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि यह तिथि स्वयं ही शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया पर किया गया दान, जप, हवन, स्नान और पूजा कभी नष्ट नहीं होती और इसका पुण्य जीवनभर बना रहता है। इस दिन विशेष रूप से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है, जिससे धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
सोना खरीदना माना जाता है शुभ
अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि यह समृद्धि और अच्छे भाग्य का प्रतीक होता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत या किसी भी नए कार्य को शुरू करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल अनंत होता है, इसलिए इसे अक्षय अर्थात् कभी न खत्म होने वाला माना गया है। आइए जानते है तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में।
अक्षय तृतीया तिथि और शुभ मुहूर्त
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि प्रारंभ: 29 अप्रैल 2025, सायं 5 बजकर 31 मिनट पर।
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि समाप्त: 30 अप्रैल 2025, दोपहर 2 बजकर 12 मिनट पर।
उदयातिथि के अनुसार, अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल 2025, बुधवार को मनाया जाएगा।
शुभ मुहूर्त
पूजा का शुभ समय: प्रातः 5 बजकर 41 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।
सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त
अक्षय तृतीया को समृद्धि और सौभाग्य का पर्व माना जाता है और इस दिन सोना खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन खरीदी गई चीज़ें अक्षय यानी कभी खत्म न होने वाला सौभाग्य लाती हैं। पंचांग के अनुसार, इस साल 30 अप्रैल को सुबह 5:41 मिनट से दोपहर 2:12 मिनट तक सोना खरीदने का सबसे अच्छा समय रहेगा। इस अवधि में की गई खरीदारी को अत्यंत लाभकारी माना जाता है और इससे घर में सुख-समृद्धि और धन-वैभव का आगमन होता है। अक्षय तृतीया का यह शुभ मुहूर्त हर तरह की नई शुरुआत और निवेश के लिए आदर्श माना जाता है। इस शुभ अवसर पर सोना खरीदना न सिर्फ आर्थिक उन्नति का प्रतीक है, बल्कि यह परिवार की खुशहाली और उज्ज्वल भविष्य का भी संकेत देता है।
अक्षय तृतीया पर इस विधि से करें पूजा
✓ब्रह्ममुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
✓इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
✓अब घर के मंदिर में भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की स्थापना करें।
✓दीपक जलाकर धूप, फूल, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
✓इसके बाद विष्णु सहस्रनाम और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
✓पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद ग्रहण करें और सभी में बांटें।
✓अंत में जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करें।
अक्षय तृतीया का महत्व
अक्षय तृतीया के दिन किसी भी मांगलिक कार्य को बिना किसी विशेष मुहूर्त के किया जा सकता है। इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या किसी नए काम की शुरुआत की जा सकती है। इसके लिए अलग से समय निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह तिथि सौभाग्य और सफलता देने वाली मानी जाती है, इसलिए इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है।
यदि नहीं खरीद सकते सोना तो मिट्टी का मटका, पीतल की वस्तु या पीली सरसों खरीदना भी शुभ
अगर इस दिन सोना खरीदना संभव न हो, तो मिट्टी का मटका, पीतल की वस्तु या पीली सरसों खरीदना भी शुभ माना जाता है। ऐसा करने से सुख-समृद्धि का आगमन होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अक्षय तृतीया का महत्व सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि जीवन में उन्नति और खुशहाली लाने के लिए भी खास माना जाता है। इस दिन किए गए अच्छे कर्म और दान-पुण्य का फल कभी खत्म नहीं होता, इसलिए लोग इसे विशेष श्रद्धा और आस्था के साथ मनाते हैं।



