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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने क्यों दिया इस्तीफा, जानें इसके विभिन्न पहलुओं को

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने क्यों दिया इस्तीफा, जानें इसके विभिन्न पहलुओं को

New Delhi news : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया। उन्होंने यह कदम मुख्य रूप से स्वास्थ्य कारणों और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए उठाया है। उन्होंने अपने त्याग-पत्र में लिखा है कि“स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और डॉक्टर की सलाह का पालन करते हुए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67(a) के अनुसार तत्काल प्रभाव से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहा हूँ।”

मार्च 2025 में AIIMS, दिल्ली में एंजियोप्लास्टी करवाई

धनखड़ (74 वर्ष) ने मार्च 2025 में AIIMS, दिल्ली में एंजियोप्लास्टी करवाई थी और जून में नैनीताल में कार्यक्रम के दौरान सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। यह व्यावहारिक तौर पर उनका स्वास्थ्य पहले से कमजोर संकेत दे रहा था। इस्तीफा देने का औपचारिक कारण उन्होंने यही बताया है।

राजनीतिक और रणनीतिक परिप्रेक्ष्य

हालाँकि उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वास्थ्य कारण बताया, पर विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस के जयराम रमेश ने इसे “सामान्य दिखावे से कहीं अधिक” बताया। रमेश ने कहा कि
धनखड़ ने उसी दिन राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता भी की थी, जिसमें अगले दिन (मंगलवार) महत्वपूर्ण Business Advisory Committee की बैठक प्रस्तावित थी। इस अचानक इस्तीफे ने समय‑सीमा और रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए।

अब आगे क्या होगा?

संविधान के अनुसार, जब उपराष्ट्रपति पद खाली हो जाता है, तो राज्यसभा का डिप्टी चेयरमैन या राष्ट्रपति दूसरे किसी सदस्य को कार्यवाहक सभापति नियुक्त कर सकते हैं। वर्तमान में यह जिम्मेदारी डिप्टी चेयरमैन हरिवंश नारायण सिंह को देने की संभावना है। उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। यह चुनाव सांसदों के संपूर्ण निर्वाचन मंडल द्वारा गुप्त मतदान के माध्यम से होगा और इसमें सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली का उपयोग होगा

स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने वाले पहले उपराष्ट्रपति बने धनकड़

धनखड़ पहले ऐसे उपराष्ट्रपति हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ा है, लेकिन वह तीसरे ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने कार्यकाल पूरा किए बिना इस्तीफा दिया है।
वी. वी. गिरि ने 1969 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दिया था। भैरों सिंह शेखावत 2007 में राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद बाद में पद खाली कर चुके हैं।इसके अतिरिक्त, कृष्ण कांत (2002 में निधन) भी बीच में कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए।

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