Dharm- adhyatm, Kya Hai Sani dosh : ग्रहों का कुंडली में शुभ और अशुभ होना हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। कुंडली में ग्रह शुभ स्थिति में हों तो अच्छे परिणाम नजर आते हैं और अगर बुरी स्थिति में हों तो बुरी घटनाएं घटने लग जाती हैं। ग्रहों का हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर पड़ता है। कुंडली में ग्रहों की चाल, उनकी दशा और दिशा व्यक्ति के जीवन में होने वाली घटनाओं को संचालित करती हैं। ग्रहों की कुंडली में स्थिति शुभ-अशुभ दोनों परिणामों की सूचक होती है। ग्रह शुभ होने पर अच्छे संकेत मिलते हैं। वहीं, ग्रह का अशुभ होना कुंडली में ग्रह दोष को दर्शाता है। साथ ही, इससे अशुभ घटनाएं भी घटित होने लगती हैं।
क्या होता है शनि दोष?
✓शनि का क्रोधित होना और ग्रह से दंडनायक देवता बनना शनि दोष कहलाता है।
✓शनि देव का किसी राशि में न्यायकर्ता के रूप में स्थान लेना शनि दोष उत्पन्न करता है।
कब लगता है शनि दोष?
✓जब कुंडली में शनि वक्री हो जाएं या शनि का स्थान नीच हो जाए तो शनि दोष लगता है।
✓वहीं, किसी जीव की हत्या करने के बाद भी कुडंली में शनि दोष लगना शुरू हो जाता है।
✓पत्नी का अपमान करने या उसके साथ अभद्र व्यवहार करने पर भी शनि दोष लगता है।
✓शनि पूजा के दौरान जानकर की गई भूल के कारण भी कुंडली में शनि दोष लगता है।
ये हैं शनि दोष दूर करने के उपाय
✓शनिवार के दिन शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाएं।
✓शनिवार के दिन शनि देव को उड़द की दाल चढ़ाएं।
✓शनिवार के दिन घर में शमी का अपुधा लगाएं।
✓शनिवार के दिन शमी के पौधे की पूजा करें।
✓रोजाना किसी बुजुर्ग की सेवा अवश्य करें।



