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मुख्यमंत्री के पहल ने दिखलाया असर, कैमरून में फंसे झारखण्ड के 27 कामगारों की हुई घर वापसी

मुख्यमंत्री के पहल ने दिखलाया असर, कैमरून में फंसे झारखण्ड के 27 कामगारों की हुई घर वापसी

Ranchi news : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश एवं श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण और कौशल विकास विभाग की त्वरित पहल पर कैमरून के याउंडे में विनायक कंस्ट्रक्शन, फेस जेंडरमेरी, अप्रेस आडिटोरियम और जीन पॉल टू मबांकलो कम्पनी में कार्यरत झारखंड के 27 श्रमिकों की बुधवार की सुबह सुरक्षित अपने घर वापसी हो गयी। श्रम विभाग को जैसे ही शिकायत मिली, उस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए एल एण्ड टी कम्पनी एवं भारतीय उच्चायोग से बात की गयी तथा उसी दिन सभी सम्बन्धित प्रवासी मजदूरों को राशि भुगतान उनके खाते में कर दिया गया। साथ ही, जो प्रवासी श्रमिक वापस अपने देश आना चाहते थे, उनको भारतीय उच्चायोग के सहयोग से भारत बुला लिया गया, जिसमें श्रम विभाग का योगदान महत्त्वपूर्ण था।

स्वदेश लौटे प्रवासी श्रमिकों में खुशी की लहर है। उन्होंने इस पहल के लिए  मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का तहे दिल से आभार जताया है। श्रमिकों ने कहा कि मुख्यमंत्री की त्वरित कार्रवाई एवं सतत प्रयास से हमलोग आज अपने घर सकुशल लौटे हैं। 

लौटने वालों में 18 प्रवासी बोकारो के 

बता दें कि लौटनेवालों में 18 बोकारो, 04 गिरिडीह तथा 05 हजारीबाग जिले के श्रमिक शामिल हैं। सभी श्रमिकों का पारसनाथ स्टेशन पर सचिव, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण व कौशल विभाग, श्रमायुक्त, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विभाग की उपस्थिति में जिला प्रशासन द्वारा माला पहना कर भव्य स्वागत किया गया। इसके पश्चात प्रवासी श्रमिकों की सकुशल वापसी के उपलक्ष्य में वेद वाटिका होटल, डुमरी में स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में उद्योग मंत्री सत्यानन्द भोक्ता, स्कूली शिक्षा मंत्री बैद्यनाथ राम, महिला बाल विकास मंत्री बेबी देवी, गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू, गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन आदि शामिल हुए।

25-25 हजार रुपये का चेक का वितरण

इस अवसर पर सभी श्रमिकों के बीच 25-25 हजार रुपये का चेक का वितरण किया गया तथा शॉल ओढ़ा कर सम्मानित किया गया। मौके पर मुख्यमंत्री से मोबाइल के माध्यम से आनलाइन श्रमिकों से बातचीत करायी गयी। उन्होंने सभी श्रमिकों की हौसला अफजाई की और कहा कि राज्य सरकार आपकी सेवा और सुविधा में सदैव तत्पर है। सरकार का प्रयास यही है कि श्रमिकों को राज्य में ही रोजगार के अवसर प्रदान किये जायें, जिससे कि श्रमिकों को कहीं पलायन नहीं करना पड़े। 

श्रम सचिव मुकेश कुमार ने जानकारी दी कि वैसे प्रवासी श्रमिक, जो इस तरह की धोखाधड़ी में फंस जाते हैं, इस निमित्त विभाग द्वारा श्रमायुक्त, झारखण्ड की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गयी है, जो इस मामले को देख रही है। इसमें जो भी ठेकेदार दोषी पाये जायेंगे, उन पर विभाग द्वारा कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जायेगी। 

श्रम सचिव ने प्रवासी मजदूरों से अपील की है कि से बाहर जाने के पूर्व श्रम विभाग में पंजीकरण अवश्य करायें।

यह है पूरा मामला 

दक्षिण अफ्रीका में फंसे 27 श्रमिकों में बोकारो के 18, गिरिडीह के 04 और हजारीबाग के 05 श्रमिक हैं। ये सभी श्रमिक इस वर्ष 29 मार्च  से वहां काम कर रहे थे। उन्होंने 16 जुलाई को ‘एक्स’ हैंडल पर 04 महीने से पारिश्रमिक  बकाया रहने और वापस भारत लौटने की इच्छा जतायी थी।

मुख्यमंत्री ने मामले को लिया संज्ञान में 

मुख्यमंत्री ने इसकी जानकारी प्राप्त होते ही श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग को आवश्यक पहल करने के निर्देश दिये। वहीं,  पीओई, रांची को सचिव, श्रम विभाग की ओर से मामले पर संज्ञान लेने हेतु पत्र भेजा गया। पत्र के माध्यम से कामगारों को उनका बकाया पारिश्रमिक और उनकी सुरक्षित झारखंड वापसी की दिशा में पहल करने को कहा था।  

राज्य सरकार की पहल पर कम्पनी ने श्रमिकों के बकाये पारिश्रमिक का किया भुगतान, हवाई टिकट की भी व्यवस्था की

श्रम विभाग के तहत कार्यरत राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष द्वारा एल एंड टी कम्पनी से सम्पर्क कर निर्देशित किया गया कि जल्द से जल्द श्रमिकों के बकाया पारिश्रमिक का भुगतान किया जाये। इस सम्बन्ध में कोलकत्ता हेड आॅफिस से सम्पर्क कर पुन: कैमरून, दक्षिण अफ्रीका को मामले से अवगत कराया गया। राज्य सरकार की इस पहल के बाद एल एंड टी कम्पनी ने 17 जुलाई को सभी 27 श्रमिकों को 03 महीने के बकाया पारिश्रमिक के रूप में 30 लाख रुपये का भुगतान किया। श्रमिकों ने बकाया पारिश्रमिक मिलने की जानकारी वीडियो के माध्यम से राज्य सरकार को दी । कम्पनी ने श्रमिकों को भारत वापस भेजने के लिए एयर टिकट की भी व्यवस्था की। 21 जनवरी को सभी श्रमिक वहां से भारत के लिए उड़ान भरे।  22 जुलाई को मुम्बई पहुंचे और फिर ट्रेन से बुधवार की सुबह झारखंड के पारसनाथ स्टेशन पर आगमन हुआ।

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