झारखंड राज्य की जनता की आवश्यकताओं से प्रधानमंत्री को कराया अवगत
Ranchi News : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन शनिवार को नयी दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में सम्मिलित हुए। इस बैठक में झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपने विचारों को रखने के साथ कई अहम सुझाव दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना विकसित राज्य से होती है, जिसमें विकसित गांव को जोड़ना सबसे जरूरी है। विकसित भारत की मूल परिकल्पना का केन्द्र बिन्दु गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तीकरण, युवा कौशल, किसानों के विकास, पूर्ण शिक्षा, आर्थिक, आधारभूत संरचना एवं तकनीकी विकास के क्षेत्र में सतत विकास है, जिसके लिए हमारी सरकार लगातार कार्य कर रही है। नीति आयोग की इस बैठक में मुख्यमंत्री ने झारखंड राज्य की जनता की आवश्यकताओं से प्रधानमंत्री को अवगत कराया।
महिलाओं का हो रहा सशक्तीकरण
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की बैठक में कहा कि राज्य सरकार महिला सशक्तीकरण के लिए लगभग 50 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 2500 रुपये की राशि प्रदान कर रही है।
01 लाख 40 हजार 435 करोड़ रुपये है बकाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में खनिज और कोयले के साथ-साथ अन्य खनिजों की बहुतायत है। इनके खनन में प्रदूषण और विस्थापन एक बहुत बड़ा कारक रहा है। खनन कम्पनियों द्वारा ली गयी भूमि, जो कि (नॉन पेमेंट आॅफ लैंड कम्पनशेशन) में आती है, उनका राज्य सरकार पर 01 लाख 40 हजार 435 करोड़ रुपये बकाया है, जिसको यथाशीघ्र मुहैया कराया जाये और सीबीए एक्ट में संशोधन कर खनन पश्चात कम्पनियों को भूमि राज्य सरकार को पुन: वापस देने का प्रावधान किया जाये। राज्य में अनाधिकृत खनन के लिए कम्पनियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। राज्य में कोल बेस्ड मीथेन गैस की बहुतायत है, जिसका तकनीकी रूप से इस्तेमाल कर ऊर्जा उत्पादन में प्रयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही राज्य में खनन कम्पनियों को कैप्टिव प्लांट लगाने की अनिवार्यता होनी चाहिए और कुल उत्पादन का 30 प्रतिशत राज्य में इस्तेमाल होने से रोजगार सृजन में भी वृद्धि होगी। प्रदेश का वन क्षेत्र पूर्वोत्तर राज्यों के समकक्ष है, जिससे आधारभूत संरचना के लिए क्लियरेंस में देरी अवरोध बनती है, जिसका निवारण किया जाये और पूर्वोत्तर राज्यों को मिलनेवाली विशेष सहायता झारखंड को भी प्रदान करायी जाये।
परिवहन सेवाओं का विस्तार हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में रेल परिचालन विस्तृत की जाये और कम्पनियों के सीएसआर फंड और डीएमएफटी फंड को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में समाहित किया जाये। प्रदेश का साहेबगंज जिला कार्गो हब की दृष्टि से बहुत ही कारगर सिद्ध हो सकता है, जो सीमावर्ती राज्यों को भी सुविधा प्रदान करेगा। इसी जिले में गंगा नदी पर अतिरिक्त पुल का निर्माण या उच्च स्तरीय बांध बनाना भी महत्त्वपूर्ण है। क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए स्ट्रेटेजिक इंपॉर्टेंट क्षेत्र में आधारभूत संरचना के विस्तार को प्राथमिकता देना पड़ेगा। राज्य में डेडीकेटेड इंडस्ट्रियल माइनिंग कॉरिडोर विकसित करने से सामान्य परिचालन में सुविधा बढ़ जायेगी।
केन्द्र सरकार की योजनाओं के मानदंड में कुछ बदलाव की आवश्यकता पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग को बताया कि झारखंड सरकार सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई योजनाएं बनायी हैं, जिनमें पेंशन योजना, मंईयां सम्मान योजना, अबुआ स्वास्थ्य योजना आदि प्रमुख है। मुख्यमंत्री ने इस सिलसिले में केन्द्र सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के मानदंड में कुछ बदलाव की आवश्यकता की बात कही। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार 25 लाख परिवारों को 05 किलोग्राम चावल प्रतिमाह, आयुष्मान योजना से वंचित 28 लाख परिवारों को 05 लाख का स्वास्थ्य बीमा, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से वंचित 38 लाख गरीब परिवारों को 15 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारी सरकार जिलावार हेल्थ प्रोफाइल तैयार कर रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाना चाहिए, जिससे प्रखंड, अनुमंडल और जिला स्तर पर स्वास्थ सेवाएं मजबूत हो सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केन्द्र की योजनाओं को राज्यों के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की योजनाएं ; जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अन्य योजनाओं की राशि मे वृद्धि होनी चाहिए। राज्य में लागू सीएनटी एवं एसपीटी एक्ट के कारण उद्यम के लिए कारक बन रहे हैं, जिसका वित्त मंत्रालय के समन्वय से निवारण अतिशीघ्र आवश्यक है।
विशेष केन्द्रीय सहायता को सभी 16 जिलों में लागू रखने की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि उग्रवाद की समस्या से निवारण के लिए सीएपीएफ की प्रतिनियुक्ति से सम्बन्धित प्रतिधारण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है, जिसे सहकारी संघवाद के सिद्धांत के तहत पूर्ण रूप से खत्म करने की आवश्यता है। नक्सल समस्या पर प्रकाश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में राज्य के 16 जिले इससे प्रभावित थे, जो कि अब 02 जिलों पश्चिमी सिंहभूम एवं लातेहार तक सिमट गया है। फिर भी विशेष केन्द्रीय सहायता को सभी 16 जिले में लागू रखने की आवश्यकता है।
मजदूरों के कल्याण और सुरक्षा के लिए सरकार लगातार कर रही कर कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड जैसी महामारी में विषम परिस्थिति उत्पन्न हुई, जिससे प्रदेश के मजदूर राज्य के बाहर काम करते थे, उनको सहायता राज्य सरकार से प्रदान करायी गयी। हाल ही में कैमरून में फंसे मजदूरों को राज्य सरकार ने अपने व्यय से वापस बुलाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैसे मजदूर, जो किसी दूसरे देश में काम करना चाहते हैं, उनके वीजा, सुरक्षा और व्यय में केन्द्र सरकार की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
केन्द्र-राज्य के बीच राजस्व बंटवारे पर भी मुख्यमंत्री ने रखी बात
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की बैठक में कहा कि 16 वें वित्त आयोग द्वारा संघीय व्यवस्था में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के बीच राजस्व के बंटवारे के संदर्भ में आवश्यक प्रक्रिया बनायी गयी है। राजस्व के वर्टिकल डेवल्यूशन 41% से करते हुए 50% होने की आवश्यकता है। वर्तमान में विभाज्य पूल का आकलन केन्द्र सरकार द्वारा वसूला जाता है। सभी उपकर, अधिभार को घटाते हुए यह किया जाता है। इसका कोई अंश विभाज्य पूल में सम्मिलित नहीं होता है। वर्ष 2017 से जी एस टी अधिनियम लागू होने के उपरांत झारखंड जैसे विनिर्माता राज्य के लिए पूर्व के वैट से राजस्व संग्रहण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। प्रारम्भिक 05 वर्षों के लिए राज्य को 14% प्रोटेक्टेड रेवेन्यू के अनुसार कम्पनसेशन की राशि मिली है। जून 2022 के बाद से राशि न मिलने से राज्य को हजारों करोड़ का राजस्व हानि हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ५्र‘२्र३ इँं१ं३ @2047 झारखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपेक्षित सहयोग प्रदान होने से विकसित झारखंड और विकसित भारत की परिकल्पना साकार होगी।
इस अहम बैठक में मुख्य सचिव अलका तिवारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्थानिक आयुक्त अरवा राजकमल, योजना सचिव मुकेश कुमार भी झारखंड की ओर से शामिल रहे।



