आतंकवाद मानवता की साझा चुनौती, दोहरे मानदंड अस्वीकार्य : मोदी
New Delhi News: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत की एससीओ नीति तीन स्तम्भों सुरक्षा, सम्पर्क और अवसर पर आधारित है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद मानवता की साझा चुनौती है और इस पर दोहरे मानदंड अस्वीकार्य हैं। वहीं, मजबूत सम्पर्क से विश्वास और विकास बढ़ता है, किन्तु इसमें सम्प्रभुता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एससीओ बहुपक्षवाद और समावेशी विश्व व्यवस्था का मार्गदर्शक बन सकता है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया।
मोदी 25वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे
प्रधानमंत्री मोदी ने उक्त बातें तियानजिन (चीन) में आयोजित 25वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को सम्बोधित करते हुए कहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सुरक्षा, शांति और स्थिरता किसी भी देश के विकास का आधार हैं, लेकिन आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद इसके बड़े अवरोध हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद केवल किसी देश की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए साझा चुनौती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत चार दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है। कितनी ही माताओं ने अपने बच्चे खोए हैं और कितने बच्चे अनाथ हुए हैं। उन्होंने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना केवल भारत की आत्मा पर आघात नहीं थी, बल्कि मानवता में विश्वास रखनेवाले हर देश और हर व्यक्ति को चुनौती थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद का खुलेआम समर्थन स्वीकार्य हो सकता है? उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद पर किसी भी प्रकार के दोहरे मानदंड स्वीकार्य नहीं होंगे। मानवता के हित में सभी को एक स्वर में आतंकवाद का हर रूप और हर रंग में विरोध करना होगा।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि एससीओ सदस्य इस दिशा में आपसी सहयोग बढ़ा सकते हैं। सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की अस्सीवीं वर्षगांठ पर सभी सदस्य देश मिलकर सुधार का आह्वान कर सकते हैं। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं को पुराने ढांचों में कैद रखना आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का मत है कि मजबूत संपर्क से केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि विश्वास और विकास के द्वार भी खुलते हैं। इसी सोच के साथ भारत चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसे उपक्रमों पर काम कर रहा है, जिससे अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ सम्पर्क बढ़ सके।
उन्होंने इस संदर्भ में इस बात पर बल दिया कि हर सम्पर्क प्रयास में सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए, जो एससीओ चार्टर के मूल सिद्धांतों में भी निहित है।
प्रधानमंत्री ने अवसर को सहयोग और सुधार की संभावना बताया। उन्होंने जन सम्बन्धों को सुदृढ़ बनाने के लिए सुझाव दिया कि एससीओ के अंतर्गत एक सभ्यतागत संवाद मंच बनाया जाये, जिससे प्राचीन सभ्यताओं, कला, साहित्य और परम्पराओं को वैश्विक मंच पर साझा किया जा सके।
भारत का विकास मंत्र देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ‘सुधार, प्रदर्शन और रूपांतरण’ के मूलमंत्र पर आगे बढ़ रहा है। कोविड-19 हो या वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, भारत ने हर चुनौती को अवसर में बदलने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार व्यापक सुधारों पर काम कर रहा है, जिससे विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने सभी को भारत की विकास यात्रा से जुड़ने का आमंत्रण दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सभी साझेदारों के साथ समन्वय और सहयोग से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने एससीओ के अगले अध्यक्ष, किर्गिजस्तान के राष्ट्रपति और अपने मित्र राष्ट्रपति जापारोव को शुभकामनाएं दीं।
कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी भारत और रूस कंधे से कंधा मिला कर चले
चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और रूस कठिन से कठिन परिस्थितियों में हमेशा कंधे से कंधे मिला कर चले हैं। दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा की तथा ऊर्जा, वित्त और आर्थिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जतायी।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर भारत-रूस सम्बन्धों की गहराई और व्यापकता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी दोनों देश हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। यह करीबी सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।
विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों नेताओं ने इस अवसर पर द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। विशेष रूप से, यूक्रेन में जारी संघर्ष और उससे जुड़े नवीनतम घटनाक्रमों पर भी गम्भीर चर्चा की गयी। प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति से कहा, ‘यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के विषय में हम लगातार चर्चा करते रहे हैं। हाल में किये गये शांति के सभी प्रयासों का हम स्वागत करते हैं। हम आशा करते हैं कि सभी पक्ष सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ेंगे। संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने और स्थाई शांति स्थापित करने का रास्ता खोजना होगा। यह पूरी मानवता की पुकार है।’
मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक, वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। उन्होंने इन क्षेत्रों में निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और आगे भी साझेदारी को नयी ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता जतायी। दोनों पक्षों ने विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की आवश्यकता को दोहराया।
प्रधानमंत्री ने अपनी वार्ता के दौरान अपने शुरुआती वक्तव्य में कहा कि दिसम्बर में भारत में होनेवाले 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत करने के लिए भारत उत्सुक है। उन्होंने अपने सम्बोधन में राष्ट्रपति पुतिन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग और मित्रता ने भारत-रूस सम्बन्धों को नयी दिशा दी है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत, रूस के साथ सभी क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं, दोनों नेताओं की बैठक से जुड़ी कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारियां भी सामने आयीं। राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक स्थल तक कार से यात्रा करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का लगभग दस मिनट तक इंतजार किया। उसके बाद दोनों नेता एक ही कार में यात्रा करते हुए आपसी मुद्दों पर चर्चा करते रहे।
द्विपक्षीय बैठक स्थल पर पहुंचने के बाद भी दोनों नेताओं ने कार में लगभग 45 मिनट तक बातचीत जारी रखी। इसके बाद उनकी द्विपक्षीय बैठक हुई, जो एक घंटे से अधिक समय तक चली। इस बैठक में भारत-रूस सम्बन्धों को और बेहतर बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
कार में हुई मुलाकात की प्रधानमंत्री ने तस्वीर भी साझा की। उन्होंने एक्स पर कहा, ‘एससीओ शिखर सम्मेलन स्थल पर कार्यवाही में भाग लेने के बाद, राष्ट्रपति पुतिन और मैं द्विपक्षीय बैठक स्थल पर साथ-साथ गये। उनके साथ बातचीत हमेशा ज्ञानवर्धक होती है।’
वहीं, शिखर सम्मेलन में भाग लेने से पहले भी प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच गर्मजोशी से मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गले मिल कर मित्रता का परिचय दिया। इस अवसर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद थे। यह मुलाकात भारत-रूस सम्बन्धों की मजबूती दर्शाती है।
पुतिन के साथ वार्ता में बोले पीएममोदी यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर सोमवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक की। दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष सहित वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की और भारत-रूस साझेदारी की मजबूती की पुष्टि की। बैठक में मोदी ने पुतिन के समक्ष यूक्रेन संघर्ष को भी जल्द समाप्त करने की मांग उठायी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने आर्थिक, वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्रों सहित द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की और इन क्षेत्रों में द्विपक्षीय सम्बन्धों में निरन्तर वृद्धि पर संतोष व्यक्त किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन में संघर्ष के समाधान के लिए हाल में की गयी पहलों के प्रति अपना समर्थन दोहराया और संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने तथा एक स्थायी शांति समाधान खोजने की आवश्यकता पर बल दिया।
मोदी और पुतिन ने दोनों देशों के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को बताया कि वह इस वर्ष के अंत में 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।



