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कश्मीर मुद्दे पर भारत ने फिर दोहराया, तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं

कश्मीर मुद्दे पर भारत ने फिर दोहराया, तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं

New Delhi News: भारत ने स्पष्ट किया है कि कश्मीर, पाकिस्तान के साथ हमारा द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती। भारत का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया है। भारत ने अपनी दीर्घकालिक नीति दोहराते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस पर भारत की स्थिति बिलकुल स्पष्ट है। पाकिस्तान को भारत के अवैध रूप से कब्जाये गये क्षेत्रों को खाली करना चाहिए और यही इस पूरे विवाद का एकमात्र लम्बित मुद्दा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में कहा कि भारत की नीति पहले जैसी ही है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, ‘जम्मू-कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश से सम्बन्धित किसी भी मुद्दे को भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय तरीके से हल किया जाना है। यह हमारी दीर्घकालिक नीति है और इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। एकमात्र लम्बित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र को खाली कराना है।’

वहीं, संघर्ष विराम के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के व्यापार को हथियार बनाये जाने के दावे को भी भारत ने खारिज किया। जायसवाल ने बताया कि 07 मई को ‘ऑपरेशन सिन्दूर शुरू होने से लेकर 10 मई को सैन्य कार्रवाई और फायरिंग रोकने पर बनी सहमति के बीच भारत और अमेरिका के नेताओं के बीच सैन्य हालात को लेकर बातचीत हुई थी, लेकिन इन चर्र्चाओं में व्यापार का कोई मुद्दा नहीं उठा। प्रवक्ता ने इस बात की जानकारी दी कि इस मुद्दे को सम्बन्धित पक्ष से उठाया गया है।

विश्व समुदाय भारत और पाक को एक दृष्टि से नहीं देखता

आतंक का भारत शिकार और पाक प्रायोजक

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ‘आपरेशन सिन्दूर’ के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भारत और पाकिस्तान को एक ही पलड़े पर नहीं तोला, बल्कि आतंकवाद के शिकार भारत और प्रयोजक पाकिस्तान के बीच साफ अन्तर किया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कुछ पक्षों की यह धारणा गलत है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सहित विश्व नेताओं ने भारत और पाकिस्तान को एक ही पलड़े पर तौला अथवा एक साथ जोड़ कर देखा। वास्तविकता इससे उलट है। पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत बाद विश्व नेताओं ने इस घटना की निन्दा करने के साथ ही आतंकवाद के शिकार भारत और प्रायोजक पाकिस्तान में साफ अन्तर किया।उल्लेखनीय है कि मीडिया, राजनीति और कुटनीतिक हलकों में यह धारणा बनी है कि दशकों बाद विश्व समुदाय भारत और पाकिस्तान को समान स्तर पर आंक रहा है। शांति और सामान्य स्थिति के लिए दोनों देशों से एक जैसी अपील की जा रही है। पाकिस्तान के नेता भी यह दावा कर रहे हैं कि हाल के घटनाक्रम से कश्मीर का मुद्दा फिर केन्द्र में आ गया है।प्रवक्ता ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पारित प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि प्रमुख देशों ने पहलगाम हमले के दोषियों और प्रायोजकों के खिलाफ स्पष्ट कार्रवाई करने पर जोर दिया है।

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