Mumbai news, Bollywood news: 12 सितबर 1986 को रिलीस हुई ‘नाम’ फ़िल्म की दास्तां भी अजीब है। दरअसल, यह फ़िल्म राजेन्द्र कुमार ने अपने बेटे कुमार गौरव का करियर स्टेबलिश करने के लिए बनायी थी और कुमार गौरव को ही सबसे पहले स्क्रिप्ट पढ़ने के लिए भी दी गयी थी तथा उसे दोनों भाइयों के किरदारों में से अपने लिए किरदार चुनने का ऑप्शन भी कुमार गौरव के पास ही पहले आया था। कुमार गौरव ने अपने लिए किरदार चुन लिया, अब सेकेंड लीड रोल के लिए कुमार गौरव ने संजय दत्त को इसीलिए ले लिया, क्योंकि साल 1984 में वह संजय दत्त की बहन नम्रता दत्त से शादी कर चुके थे। इस लिहाज से ये दूसरे भाई का किरदार संजय दत्त को दे दिया गया।
राजेन्द्र कुमार ने कुमार गौरव को समझाया था कि…
हालांकि, राजेन्द्र कुमार साहब ने कुमार गौरव को समझाया था के संजय दत्त वाला किरदार ज्यादा स्ट्रांग है। लेकिन, कुमार गौरव ने फिर भी अच्छा कैरेक्टर वाला किरदार ही चूज़ किया। उस वख्त चाहे संजय दत्त काफी फिल्मों में पहले काम कर चुके थे, लेकिन फिर भी उनकी नेगेटिव इमेज उनके करियर के आड़े आ रही थी। उन्हें डर था के यह उनकी नेगेटिव छवि फ़िल्म को डूबा ना दे, लेकिन फ़िल्म रिलीज होने के बाद सबके अंदाज़े धरे के धरे रह गये। इस फ़िल्म में दो बड़े कारनामे किये। एक तो संजय दत्त जिसकी वजह से फ़िल्म फ्लॉप हो सकती थी, वह सुपरस्टार बन गया और जिसने पैसा लगाया था कुमार गौरव, उस फिल्म का हीरो होते हुए भी सदा के लिए फ्लॉप हो गया। इस फ़िल्म के बाद संजय दत्त का करियर आसमान की ऊंचाइयां छू गया और कुमार गौरव लाख कोशिशों के बावजूद फिर उठ नहीं पाया। और जो सपना राजेन्द्र कुमार ने अपने बेटे को सुपरस्टार बनने का देखा था, उनका सपना तो पूरा नहीं हुआ, लेकिन सुनील दत्त का सपना अपने बेटे को सुपरस्टार बनाने का, इस फ़िल्म ने पूरा कर दिया।



