Categories


MENU

We Are Social,
Connect With Us:


Categories


MENU

We Are Social,
Connect With Us:

☀️
–°C
Fetching location…

भारत-चीन समझौते के परिणाम एलएसी पर देर-सबेर सामने आयेंगे : राजनाथ

भारत-चीन समझौते के परिणाम एलएसी पर देर-सबेर सामने आयेंगे : राजनाथ

• नयी दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में शुरू हुआ चाणक्य डिफेंस डायलॉग का दूसरा संस्करण

New Delhi news : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत और चीन एलएसी के कुछ क्षेत्रों में अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच समान और पारस्परिक सुरक्षा के सिद्धांतों के आधार पर जमीनी स्थिति बहाल करने के लिए व्यापक सहमति बनी है। इसमें पारम्परिक क्षेत्रों में गश्त और चराई भी शामिल है। यह सहमति बनना लगातार बातचीत का ही नतीजा है, जिसके परिणाम देर-सबेर सामने आयेंगे।
चाणक्य डिफेंस डायलॉग का दूसरा संस्करण गुरुवार से नयी दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में शुरू हुआ। ‘राष्ट्र निर्माण में प्रेरक: व्यापक सुरक्षा के माध्यम से विकास को बढ़ावा देना’ थीम पर दो दिनों तक नीति निर्माता, विद्वान और विशेषज्ञ वर्तमान सुरक्षा चिन्ताओं को समझने, राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए राष्ट्र निर्माण के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। रक्षा मंत्री ने ‘भारत के विकास और सुरक्षा के दृष्टिकोण’ पर अपने विचार रखते हुए कहा कि दूसरा चाणक्य रक्षा संवाद गहन विचार-विमर्श को सुविधाजनक बनायेगा, रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देगा और राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास को बढ़ाने के लिए कार्रवाई योग्य अंतर्दृष्टि के निर्माण में योगदान देगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सुरक्षा को अक्सर सीमा सुरक्षा से जोड़ कर देखा जाता है। जब हम सुरक्षा के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में सीमा पर तैनात सैनिकों, आसमान में गश्त करने वाले विमानों और समुद्र की रखवाली करनेवाले नौसैनिक जहाजों की छवि आम तौर पर आती है। जब हम घरेलू स्तर पर हथियार और रक्षा उपकरण बनाते हैं, तो इससे न केवल हमारा सुरक्षा ढांचा मजबूत होता है, बल्कि अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्र भी मजबूत होते हैं। हमें इस बात का गम्भीरता से पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए कि आर्थिक विकास के बारे में चर्चा में रक्षा जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को अधिक महत्त्व क्यों नहीं दिया जाता है। रक्षा व्यय तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देता है, रोजगार सृजन करता है तथा विभिन्न उद्योगों को प्रोत्साहित करता है, फिर भी पारम्परिक आर्थिक अध्ययनों में इसे तुलनात्मक रूप से बहुत कम ध्यान दिया जाता है।
पत्रकार सुश्री पालकी शर्मा की अध्यक्षता में चाणक्य डिफेंस डायलॉग के पहले सत्र के पैनल में सुश्री लिसा ए कर्टिस, सुश्री कैरिस विट्टे और अम्ब कंवल सिब्बल शामिल हुए। पैनलिस्ट ने शांति और सुरक्षा के लिए साझेदारी विकसित करने, राष्ट्रीय हितों को संतुलित करने और विकास लक्ष्यों को राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के साथ जोड़ने के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि साझा की। सत्र की चर्चा में वर्तमान भू-राजनीतिक गतिशीलता, राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक रोडमैप का निर्माण शामिल था। सत्र के अंत में सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने पैनलिस्टों को उनके व्यावहारिक विचारों और चर्चा के लिए सम्मानित किया।

Share this:

Latest Updates