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लड़का विदेश में गया हुआ तो क्या हुआ, संस्कार में दम होगा तो खींच लेगा देश में…

लड़का विदेश में गया हुआ तो क्या हुआ, संस्कार में दम होगा तो खींच लेगा देश में…

Varanasi news : वाराणसी यानी काशी। दुनिया के प्राचीनतम शहरों में भारत का यह शहर शुमार किया जाता है। यह बाबा विश्वनाथ की नगरी है और यहां की भाषा तो ऐसी कि किसी और को जब चाहे ऐसी की तैसी कर दे। शहर के हर नुक्कड़ पर बहस की बेजोड़ संस्कृति और राजनीतिक चेतना से संपन्न हर नागरिक। कब किसे चुनाव जिता दे, कब हरा दे, यह कोई नहीं जानता। आज के वक्त में लगातार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां से तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। कभी कांग्रेस के आला नेता कमलापति त्रिपाठी ने भी यहां का प्रतिनिधित्व लोकसभा में किया था।

मिट्टी और भाषा के संस्कार

बनारस के सबसे बड़ी खासियत है कि यहां के लोग कहीं भी चले जाएं, लेकिन यहां की मिट्टी और भाषा के संस्कार इतनी मजबूत हैं कि उन्हें फिर खींच कर यही लाते हैं। कोई चिंता नहीं कि कोई लड़का विदेश पढ़ने चला गया तो चला गया। संस्कार में दम होगा तो फिर से उसे वक्त बनारस में खींचकर लाएगा और वह यहां अपनी सेवा देगा। इसके साथ ही यहां की हर गतिविधि और हर बिजनेस में भी बनारस की संस्कृति बोलती है। आज हम बात कर रहे हैं यहां के एक होटल की। होटल का नाम है ‘लोकल लोक’ और इसकी संचालिका हैं विरोनिका। विरोनिका ने स्विट्जरलैंड से हॉस्पिटैलिटी की पढ़ाई की है।

बनारस की संस्कृति का प्रतिबिंब

लोकल फॉर लोकल की थीम पर बने इस होटल की छत के नीचे आप फाइव स्टार होटल का एहसास कर सकते हैं। मुख्य गेट से लेकर अंदर की हर दीवार बनारस की संस्कृति का प्रतिबिंब निखारती है। शिवपुर में बना यह होटल इन दिनों यहां आने वाले पर्यटकों को खूब लुभा रहा है। होटल में फॉल्स सीलिंग के साथ दीवारों को दुनिया में पहचान रखने वाली बनारसी साड़ी से खूबसूरत तरीके से डिजाइन कराया गया है। विरोनिका बताती हैं कि यहां लगाए गए हर समान भी आस पास के लोगों से ही खरीदे गए हैं। इसके अलावा यहां काम करने वाले कर्मचारी भी बनारस के हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को बनारसी होने का अहसास भी कराते है।

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