- ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के साथ विकसित होते भारत का प्रतीक है निस्तार : संजय सेठ
- देश के 120 एमएसएमई सेक्टर के सहयोग से तैयार हुआ 10,500 टन का जहाज
- भारत हिन्द महासागर क्षेत्र में ‘पसंदीदा पनडुब्बी बचाव साथी’ के रूप में उभरेगा
- छत्रपति शिवाजी की नौसेना की विरासत को लेकर आगे बढ़ रहा है भारत एजेंसी
New Delhi News: स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) ‘निस्तार’ शुक्रवार को भारतीय नौसेना के समुद्री बेड़े में शामिल हो गया। विशाखापत्तनम स्थित नौसेना डॉकयार्ड में जलावतरण के बाद यह जहाज गहरे समुद्र में गोताखोरी और पनडुब्बी बचाव कार्यों में सहायता के लिए पूर्वी नौसेना कमान में शामिल हो गया है। इससे न केवल समुद्र के भीतर भारत की सैन्य ताकत बढ़ेगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में इसकी सामरिक समुद्री स्थिति भी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
कमीशनिंग समारोह रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ की अध्यक्षता में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा और रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में तैयार हुआ निस्तार आत्मनिर्भर होते भारतीय नौसेना का प्रतीक है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे मंत्रों ने भारत को जो शक्ति दी है, निस्तार इस शक्ति का सफल परिणाम है। आज भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ा है। हमारे कर्मयोगियों, वैज्ञानिकों के अनथक परिश्रम का परिणाम है कि हम स्वदेश में निर्मित जहाज का जलावतरण कर रहे हैं, विकसित भारत की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे सभी कर्मयोगियों को मैं बधाई देता हूं। उन्हें सैल्यूट करता हूं। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में 80 फीसदी स्वदेशी सामग्री और 120 एमएसएमई के सहयोग से निर्मित ‘निस्तार‘ गहरे समुद्र में गोताखोरी और पनडुब्बी बचाव के लिए सुसज्जित है। इस जहाज पर विशाल डाइविंग कॉम्प्लेक्स एयर एंड सैचुरेशन डाइविंग सिस्टम के साथ मौजूद है। साथ ही पानी के अंदर रिमोटली आॅपरेटेड व्हीकल्स (आरओवी) और साइड स्कैन सोनार भी लगाया गया है, जो जहाज के परिचालन क्षेत्र को काफी हद तक बढ़ाता है। जलावतरण के बाद इसे गोताखोरी और पनडुब्बी बचाव कार्यों में सहायता के लिए पूर्वी नौसेना कमान में शामिल किया गया है।
स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित डाइविंग सपोर्ट वेसल ‘निस्तार‘ 08 जुलाई को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। नौसेना में पहले ही ‘निस्तार’ नाम का एक पनडुब्बी बचाव पोत था, जिसे भारतीय नौसेना ने 1969 में तत्कालीन सोवियत संघ से हासिल करके 1971 में कमीशन किया था। उस जहाज ने 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में अहम भूमिका थी और दो दशकों की सेवा में भारतीय नौसेना के गोताखोरी और पनडुब्बी बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अब गोताखोरी सहायता पोत (डीएसवी) ‘निस्तार’ इसी विरासत को आगे बढ़ाएगा। इस पोत की लंबाई लगभग 120 मीटर की लंबाई है और डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम का उपयोग करके 10 हजार टन से अधिक भार विस्थापन की क्षमता है।
इस पोत को नौसेना के बेड़े में शामिल करने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी बचाव तैयारियों में एक बड़ी क्षमता वृद्धि होगी। इस जहाज में आॅपरेशन थियेटर, गहन चिकित्सा इकाई, आठ बिस्तरों वाला अस्पताल और हाइपरबेरिक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। पोत में समुद्र के अंदर 60 दिनों से अधिक समय तक टिके रहने की क्षमता, हेलीकॉप्टर के माध्यम से परिचालन करने की सुविधा है। इससे भारत इस क्षेत्र में ‘पसंदीदा पनडुब्बी बचाव साथी’ के रूप में उभरेगा। दुनिया की कुछ ही नौसेनाओं के पास ऐसी क्षमता है और उनमें से कुछ में यह क्षमता स्वदेशी रूप से विकसित की गई है।
आज निस्तार की शुरूआत हमारे समुद्री औद्योगिक आधार की समृद्ध क्षमता और प्रौद्योगिकी का प्रमाण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक और शानदार उदाहरण है।
2300 करोड़ की लागत से बना स्वदेशी निस्तार राष्ट्र को समर्पित

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