Mumbai news, Actress Parveen Bobby, Bollywood news : बिग बी की ‘मुकद्दर का सिकंदर’ फिल्म का एक गीत है, जिंदगी तो बेवफा है, एक दिन ठुकराएगी, मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जाएगी। आप समझ रहे होंगे कि आखिर हम यह बात क्यों कह रहे हैं, क्योंकि यह तो सब लोग जानते हैं। बेशक यह सब लोग जानते हैं, लेकिन यह मानने को तैयार नहीं होते हैं कि जिंदगी का ग्लैमर उस वक्त खाक बनकर रह जाता है, जब मौत का निर्मम खंजर चलता है और कोई आंखों के सामने नहीं होता है या खंजर चल जाने के बाद कोई डेड बॉडी को सम्मान देने वाला नहीं मिलता है। यह जिंदगी की सच्चाई है और जब हम बॉलीवुड की दुनिया में देखते हैं तो ऐसे- ऐसे ग्लैमर को खाक होते हुए पाते हैं, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। बॉलीवुड की एक्ट्रेस परवीन बॉबी की जिंदगी के अंत से यह संदेश मिलता है कि समाज में ऐसा बनें, ताकि मौत के बाद लोग सम्मान दें। आज के 19 साल पहले 2005 में जब परवीन बॉबी की मौत हुई थी, तो उनकी पास कोई नहीं था। यहां तक की फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने भी उन्हें कोई सम्मान नहीं दिया। मात्र 50 साल की उम्र में उन्होंने दर्द भरी जिंदगी को अलविदा कहा था। तीन दिन तक फ्लैट के एक कमरे में डेड बॉडी पड़ी हुई थी और किसी को नहीं मालूम था कि यह मशहूर एक्ट्रेस मर चुकी है।
बिग बिग की मशहूर अभिनेत्रियों में एक
जब अमिताभ बच्चन अपने स्टारडम के सबसे उंचे शिखर पर थे, उसे समय उनके साथ कोई भी अभिनेत्री काम कर गर्व महसूस करती थी। उनके साथ जिन अभिनेत्रियों ने काम किया, उनमें परवीन बॉबी का भी नाम लिया जाता है। कहा जाता है कि परवीन बाबी ने 70 और 80 के दशक में फिल्मी दुनिया में तहलका मचा दिया था। जिस एक्ट्रेस को स्टारडम के चरम पर पहुंचने पर पूरी फिल्म इंडस्ट्री ने पूजा, उसी एक्ट्रेस को उसके दुखभरे दिनों में भुला दिया गया।
रेयर बीमारी ने गजब की दी पीड़ा
प्रवीण एक ऐसी मानसिक बीमारी के दौर से गुजर रही थी जिसे समझ पाना अत्यंत कठिन था। इस वजह से परवीन बाबी कई लोगों को अपनी जान का दुश्मन समझने लगी थीं। वह अमिताभ बच्चन और यहां तक कि प्रिंस चार्ल्स को भी इन्हीं नजरों से देखती थीं। उनका कहना था कि वो लोग उन्हें मार डालेंगे। मौत के बाद जब उनकी डेड बॉडी का पोस्टमार्टम हुआ तो पता चला कि उनके पेट में एक भी दान नहीं था। भगवान करे इस दुनिया में किसी भी व्यक्ति की डेथ के साथ ऐसे दर्द भरी कहानी ना हो। यह भी कहा जाता है कि उनका अंतिम संस्कार उनके अपने परिवार के लोगों ने नहीं किया, तब जाकर यह आरएएस महेश भट्ट ने पूरी की थी।



