Guwahati News : पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण पूर्वोत्तर भारत में भीषण बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है। असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत हुई है। भारतीय मौसम विभाग ने इस भारी बारिश का कारण बांग्लादेश के ऊपर बने निम्न दबाव को बताया है।
गुवाहाटी के चपाइडांग में भूस्खलन से महिला और बच्चों समेत तीन लोगों की मौत हो गयी। अरुणाचल प्रदेश में भूस्खलन के कारण कम से कम नौ लोगों की मौत की खबर है। ईस्ट कामेंग जिले में बाना-चेप्पा हाईवे पर एक वाहन के खाई में गिर जाने से दो परिवारों के सात सदस्यों की मौत हो गयी।
निचले सुबनसिरी जिले के पास हुए भूस्खलन में भी दो लोगों की मौत की जानकारी सामने आयी है। पश्चिम कामेंग में बालीपारा-चरदुवार-तवांग मार्ग पर हुए भूस्खलन के कारण कई गांवों का संपर्क मार्ग बंद हो गया, जिससे कई यात्री फंसे हुए हैं।
मणिपुर में अचानक आयी बाढ़ और भूस्खलन ने पहाड़ी जिलों सेनापति, तमेंगलोंग, नुने और फेरजॉल में तबाही मचायी है। इंफाल नदी का तटबंध टूटने से इंफाल पूर्व का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है। राज्य प्रशासन ने बताया कि इंफाल पूर्व और पश्चिम जिलों से महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और अन्य लोगों सहित कम से कम 800 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
भारतीय सेना और असम राइफल्स ने ‘आॅपरेशन जलराहत’ के तहत मणिपुर के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों से लगभग 800 नागरिकों को शनिवार को बचाया है। शनिवार को इंफाल में बारिश के कारण भारी जलभराव हो गया, जिससे सड़कों पर यातायात ठप हो गया और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। शहर और इसके आसपास के निचले इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए। मिजोरम में भी स्थिति कुछ अलग नहीं रही। बीते 24 घंटों में विनाशकारी बाढ़ के चलते चार लोगों की मौत हो चुकी है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, चंपाई जिले में अचानक आयी बाढ़ में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गयी, जबकि सेरछिप में एक अन्य व्यक्ति की जान चली गयी। कई जिलों में भूस्खलन से घरों और सड़कों को नुकसान पहुंचा है। खबर लिखे जाने तक मलबे के नीचे एक व्यक्ति दबा हुआ बताया जा रहा है।
मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह और आपदा प्रबंधन मंत्री प्रोफेसर लालनिलावमा ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर मृतकों के परिजनों के लिए चार लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की है। राज्यभर में राहत और निगरानी अभियान जारी है।
अमित शाह ने दिया हर सम्भव मदद का भरोसा
असम में मूसलधार बारिश से उत्पन्न बाढ़ और भूस्खलन की गम्भीर स्थिति के बीच केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य को केन्द्र सरकार की ओर से हर सम्भव सहायता का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने रविवार को बताया कि गृह मंत्री ने उन्हें फोन कर हालात की जानकारी ली और सभी जरूरी मदद देने का वादा किया।
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘गृह मंत्री अमित शाह ने थोड़ी देर पहले मुझे फोन कर असम में बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी ली और हर सम्भव सहायता का आश्वासन दिया। मैंने उन्हें अब तक की गयीं तैयारियों से अवगत कराया। हम उनके संवेदनशील रवैये और सहयोग के लिए आभारी हैं।’
राज्य के 12 जिलों में बाढ़ और भूस्खलन से हालात बेहद खराब हैं। अब तक 58,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। 01 जून को ब्रह्मपुत्र नद डिब्रूगढ़ में खतरे के निशान को पार कर गयी, जिससे स्थिति और गम्भीर हो गयी है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, अबतक आठ लोगों की मौत हो चुकी है और 175 गांव प्रभावित हुए हैं। इनमें 03 की मौत बाढ़ में और 05 की भूस्खलन में हुई है। ये मौतें गोलाघाट, लखीमपुर और कामरूप (मेट्रो) जिलों में हुई हैं। गोलाघाट और गुवाहाटी में बच्चों की भी जान गयी हैं।
सात हजार से अधिक लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। धेमाजी, दक्षिण सालमारा, लखीमपुर, डिब्रूगढ़, गोलाघाट और कार्बी आंगलोंग के 175 गांव प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने 16 राहत शिविर और वितरण केन्द्र स्थापित किये हैं, जहां 7000 से अधिक लोग शरण लिये हुए हैं।
फसल और पशुधन को भारी नुकसान हुआ है। करीब 791 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गयी है। लगभग 76 हजार पशु प्रभावित हुए हैं और 194 पशुओं के बह जाने की जानकारी मिली है। सड़क और अन्य ढांचागत नुकसान भी व्यापक पैमाने पर हुए हैं।
22 सड़कों, एक पुल, कई तटबंधों और सिंचाई नहरों को नुकसान पहुंचा है। स्कूल और आंगनवाड़ी केन्द्रों की इमारतें भी प्रभावित हुई हैं। गुवाहाटी और अन्य जिलों में शहरी बाढ़ के चलते करीब 10 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, अग्निशमन सेवा और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं।
मौसम विभाग ने और बारिश की चेतावनी दी है। ऐसे में राज्य प्रशासन सतर्क है और नुकसान को कम करने के प्रयास जारी हैं।



