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Good news : अब दिल में छेद के मरीजों को झारखंड से बाहर जाने की जरूरत नहीं 

Good news : अब दिल में छेद के मरीजों को झारखंड से बाहर जाने की जरूरत नहीं 

मेडिका में हुआ मरीज़ों का निःशुल्क सफ़ल डिवाइस क्लोजर

Ranchi News : भगवान महावीर मेडिका हॉस्पीटल, रांची ने ‘मासूम धड़कन‘ कार्यक्रम के तहत एक ऐसा अनूठा कार्य किया है जो निजी अस्पताल की दुनिया के लिए मिसाल है। इसके तहत हृदय के छेद (ASO) VSD/PDA) से पीड़ित 13 मरीजों की बिना चिरफाड़ के डिवाइस लगाकर बंद किया गया।  इस कार्यक्रम के सूत्रधार कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. धनञ्जय कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि कुछ समय पहले एक 5  साल का बच्चा दिल में छेद के साथ उनसे मिला, जिसे झारखंड सरकार द्वारा राज्य से बाहर के अस्पताल में चिकित्सा के लिया भेजा जा रहा था, पर वह मरीज़ किन्ही कारणों से वहां नहीं पहुँच पाया और परिणाम यह हुआ कि विलंब होने के कारण अब उसके दिल का छेद बंद नहीं किया जा सकता। इससे उसकी आयु काफी कम हो जायेगी।

3 से लेकर 36 साल तक के मरीज़ों के दिल का छेद का इलाज किया गया

 डॉ. धनञ्जय ने तब यह निश्चय किया कि ऐसी व्यवस्था बनायीं जाय जिससे राज्य से दिल के मरीज़ों का यही इलाज हो सके। इस सोच को साथ मिला भगवान महावीर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (जैन समाज) के अध्यक्ष पूरनमल जैन का। उनसे मिलकर इसकी रूपरेखा तय की गई। डॉ. धनञ्जय ने आगे बताया कि 3 साल के बच्चे से लेकर 36 साल तक के मरीज़ों के दिल का छेद सफलतापूर्वक बंद किया गया। इसमें सबसे चुनौतीपूर्ण 20 वर्षीय लड़की का 44 एमएम छेद को सबसे बड़ी साइज़ 46 एमएम डिवाइस से सफलतापूर्वक बंद किया गया। 

मेडिका ‘मासूम धड़कन’ की पहल करने वाला झारखंड का पहला निजी हॉस्पिटल

भगवान महावीर मेडिका के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. विजय कुमार मिश्र ने बताया कि इस तीन दिवसीय कार्यक्रम की तैयारी में सूक्ष्म बिंदुओं का भी ध्यान रखा गया।  सभी मरीज़ों और उनके परिजनों के भोजन, रहने की व्यवस्था जैन समाज के सौजन्य से महावीर भवन में की गयी थी। डॉ. विजय ने कहा कि हमें गर्व है कि मेडिका निजी अस्पतालों में  पहला अस्पताल है जिसने अपनी सामाजिक-नैतिक दायित्व का प्रथम चरण सफलता पूर्वक पूरा किया है। 

डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि निजी अस्पताल में इलाज कराने पर एक मरीज पर लगभग 3 लाख का खर्च आता है, जिसे मेडिका में निःशुल्क किया गया। डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि कई मरीज़ों को डिवाइस लगाना संभव नहीं था उनकी जांच कर ऑपरेशन की तिथि निश्चित की गयी है।  डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि 3 दिनों तक डॉक्टर की टीम कैथ लैब में लगातार मौजूद रहें और मरीज़ों की हर स्थिति पर ध्यान रखा गया। उन्होंने कहा कि मीडिया एवं अन्य संस्थाओं के माध्यम से समाज में जागरूकता लाने की जरूरत है ताकि ऐसी गतिविधियाँ आगे भी होती रहे। 

जैन समाज ऐसी पहल में हमेशा साथ रहेगा

भगवान महावीर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के डॉ. वी के जैन और पदम कुमार जैन ने बताया कि जैन समाज आगे भी ऐसी पहल के लिए हमेशा साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने झारखण्ड सरकार से अपील की कि सरकार की तरफ से ह्रदय रोगियों को दूसरे राज्यों में न भेजे । जब मेडिका रांची में सभी प्रकार की सुविधा एवं अनुभवी डाक्टरों की टीम उपलब्ध है तब ऐसे ऑपरेशन यहीं हो। मेडिका में मरीज़ों को सफल डिवाइस क्लोजर लगाया जाना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। 

मेडिका रांची हृदय चिकित्सा विकसित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा

मेडिका कोलकाता में बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाले डॉ. अनिल सिंघी ने कहा कि मेडिका रांची भी एक व्यापक बाल हृदय चिकित्सा विकसित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। उन्होंने इस पहल की सफलता पर सभी को शुभकामनायें दी। ‘मासूम धड़कन’ पहल को सफल बनाने में डॉ. अमित प्रकाश चंद्र, डॉ. लता भट्टाचार्य, डॉ. अलका, क्रिटिकल केयर की टीम का योगदान सराहनीय रहा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हॉस्पिटल डायरेक्टर आबिद तौकीर, डीजीएम डॉ. दीपक मल्लिक और ब्रांड- मीडिया हेड भारती ओझा उपस्थित थे।

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