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Mission admission : स्कूल की तानाशाही का शिकार बीपीएल परिवार, बच्ची को नहीं मिला एडमिशन

Mission admission : स्कूल की तानाशाही का शिकार बीपीएल परिवार, बच्ची को नहीं मिला एडमिशन

Jamshedpur news : बिष्टुपुर के धतकीडीह तारापोर स्कूल से महज 50 मीटर और डीएवी से 150 मीटर की दूरी पर रहने वाली एक बच्ची मिमसा आलम के परिजनों को बीपीएल कोटा में अहर्ता रखने के बावजूद लाभ नहीं मिल पा रहा है. जहां एडमिशन में हुए शिक्षा के अधिकार के कानून के उलंघन का एक मामला प्रकाश में आया है तो वहीं शिक्षा विभाग की नाकामी भी सामने आई है.बच्ची के पिता ऐतेशाम आलम पेशे से ड्राइवर हैं जो एक साल से जिला शिक्षा अधीक्षक,डीडीसी और स्कूल ऑफिस के चक्कर काटते रहे लेकिन उनकी बच्ची को एडमिशन नहीं मिला.

क्या कहता है शिक्षा का अधिकार अधिनियम

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्ची का एडमिशन चंद कदम की दूरी पर स्थित तारापुर स्कूल में ही होना था.शिक्षा विभाग द्वारा बीपीएल कोटा के तहत बच्ची का नाम तारापुर स्कूल को भेजा जाता, लेकिन उसे 150 मीटर दूर स्थित डीएवी बिष्टुपुर भेजा गया. शिक्षा का अधिकार अधिनियम कहता है कि बच्चे के आवास से 3 किलोमीटर की दूरी के अंदर ही नजदीकी स्कूलों की 25% सीटें बीपीएल और अभिवंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं तो फिर इस नियम का पालन क्यों नहीं हुआ?

मुख्यमंत्री और डॉ अजय कुमार से गुहार

‌थक हार कर ऐतेशाम ने मुख्यमंत्री और डॉ अजय कुमार से न्याय दिलाने की एक मार्मिक अपील ट्विटर पर कर दी.ऐतेशाम ने डॉ अजय और सीएम को टैग लिखा कि तारापुर स्कूल के ठीक पीछे घर होने का बावजूद बीपीएल कोटा से मेरा नाम डीएवी बिष्टुपुर को भेजा गया और 8 महिनों तक दौड़ाने के बाद बच्चे का एडमिशन नहीं लिया गया या अल्पसंख्यक होना गुनाह है?देखा जाए तो एक पीड़ित पिता के इस ट्वीट से स्कूलों पर भेदभाव के आरोप लग रहे हैं. आज इस ट्वीट पर कुछ लोगों ने अपने स्तर से जवाब भी दिए और सरकार को भी कोसा लेकिन जब डॉक्टर अजय कुमार की नजर इस ट्वीट पर पड़ी तो उन्होंने मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन से डीसी पूर्वी सिंहभूम को संज्ञान लेने के लिए निर्देशित करने का अनुरोध किया है.डॉ अजय ने लिखा है कि शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का अधिकार है और हमारी सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि कोई बच्चा इससे वंचित न रहे.

परिजन दौड़ते रहे डीएसई और स्कूल ऑफिस

एक साल से ऑफिस-ऑफिस घूम रहे परिजन 3 महीने पहले इसकी शिक़ायत लेकर डीसी ऑफिस भी गए जहां डीसी की अनुपस्थिति में डीडीसी को सारी बात बताई गई.डीडीसी द्वारा तत्कालीन जिला शिक्षा अधीक्षक को कहा भी गया.इसके बाद जिला शिक्षा कार्यालय से ऐतेशाम को डीएवी स्कूल भेजा गया जहां उसकी बच्ची का नाम 16 सितंबर 2023 को ही भेज दिया गया था.किंतु स्कूल की प्राचार्या प्रज्ञा सिंह ने साफ मना कर दिया कि सीट खाली नहीं है इसलिए हम एडमिशन नहीं लेंगे. परिजनों को स्कूल और जिला शिक्षा कार्यालय के चक्कर काटते एक साल हो गए हैं और अब बच्ची की उम्र सीमा भी पार हो गई है.दो दिन पहले फिर से ऐतेशाम वर्तमान जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष पांडे से मिले तो परिजनों को फिर से डीएवी स्कूल भेजा गया लेकिन कुछ नहीं हुआ. सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों का चक्कर काटते-काटते थक चुके एक अल्पसंख्यक परिवार ने आखिरकार उम्मीद ही छोड़ दी.

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